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Monday, June 29, 2026

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में बड़ा प्रशासनिक एक्शन, 17 वर्षों से तैनात आरएमओ अर्जुन देव हटाए गए

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अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि परिसर में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। मंदिर में वर्ष 2009 से लगातार तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (आरएमओ) अर्जुन देव को उनके पद से हटा दिया गया है। वह मंदिर परिसर में लगे लगभग 1600 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, काउंटिंग रूम की सुरक्षा व्यवस्था और वायरलेस संचार प्रणाली के प्रमुख जिम्मेदार अधिकारियों में शामिल थे। उनके हटाए जाने को चल रही जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मंदिर परिसर में अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और सैकड़ों कैमरों की निगरानी के बावजूद करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित अनियमितताएं और चोरी कैसे होती रही। इसी कड़ी में विशेष जांच दल (एसआईटी) और पुलिस निगरानी व्यवस्था की भूमिका की भी गहन जांच कर रही है।

सूत्रों के अनुसार अर्जुन देव वर्ष 2009 से लगातार अयोध्या में तैनात थे। इस दौरान कई बार उनके तबादले के आदेश जारी हुए, लेकिन हर बार किसी न किसी स्तर पर वे निरस्त या रोक दिए गए। हाल ही में लखनऊ स्थानांतरण का आदेश भी निरस्त कर दिया गया था। अब एसआईटी यह भी जांच कर रही है कि आखिर 17 वर्षों तक एक ही स्थान पर उनकी तैनाती कैसे बनी रही और उनके तबादले बार-बार किसके स्तर से रुकवाए गए।

जांच में यह भी सामने आया है कि अर्जुन देव केवल सुरक्षा और वायरलेस संचालन तक सीमित नहीं थे, बल्कि वीआईपी दर्शन व्यवस्था सहित ट्रस्ट के कई महत्वपूर्ण कार्यों में भी उनकी सक्रिय भूमिका थी। एसआईटी उनसे पूछताछ कर चुकी है और अब उनके अधिकार क्षेत्र, कार्यप्रणाली तथा ट्रस्ट के पदाधिकारियों से उनके संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।

उधर, चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच लगातार तेज हो रही है। आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी, दस्तावेजों की जांच और पूछताछ का सिलसिला जारी है। वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को लेकर दिल्ली जाने की चर्चाओं के बीच ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों ने दावा किया है कि वह अयोध्या में ही मौजूद हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भी अपनी स्तर पर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। संघ के क्षेत्र प्रचारक संतों, महंतों और मंदिर से जुड़े लोगों से फीडबैक जुटा रहे हैं। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव पर मंथन किया जा सकता है।

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