मरीजों से खुलेआम हो रही धन उगाही, अस्पताल प्रशासन बेबस
संदीप सक्सेना
फर्रुखाबाद। डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय इन दिनों इलाज से ज्यादा दलालों के आतंक को लेकर चर्चा में है। अस्पताल परिसर में दलालों का पूरा गिरोह सक्रिय बताया जा रहा है, जो भोले-भाले मरीजों और उनके तीमारदारों को बरगलाकर उनसे अवैध रूप से धन उगाही कर रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अस्पताल प्रशासन इन दलालों पर रोक लगाने में नाकाम साबित हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जांच, भर्ती, दवा, बेड और रेफर कराने के नाम पर दलाल अपने जाल में फंसा लेते हैं। मरीजों को डराया जाता है कि बिना पैसे दिए उनका काम नहीं होगा, जिससे मजबूर होकर वे मोटी रकम देने को विवश हो जाते हैं।
शिकायतों के बाद भी नहीं थम रहा खेल
यह कोई पहली बार नहीं है जब लोहिया अस्पताल में दलालों का मामला सामने आया हो। इससे पहले भी कई बार ऐसे मामलों की शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई, लेकिन कार्रवाई कागजों तक ही सीमित रह गई। नतीजा यह है कि आज भी दलाल बेखौफ होकर अस्पताल परिसर में घूमते नजर आते हैं।
अंदरूनी मिलीभगत के आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह है कि अस्पताल के कुछ विभागों में तैनात कर्मचारी भी इस स्क्रिप्ट का हिस्सा बने हुए हैं। बताया जा रहा है कि अंदर के कर्मचारी मरीजों की जानकारी बाहर के दलालों तक पहुंचाते हैं और फिर दोनों मिलकर धन उगाही को अंजाम देते हैं। वहीं, बाहरी दलाल भी मरीजों से पैसे ऐंठने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
मरीजों की मजबूरी का उठाया जा रहा फायदा
दूर-दराज से इलाज के लिए आने वाले गरीब और असहाय मरीज इस गिरोह का सबसे आसान शिकार बन रहे हैं। इलाज की उम्मीद लेकर आए मरीजों को दलालों की वजह से मानसिक और आर्थिक शोषण झेलना पड़ रहा है।
प्रशासन पर उठे सवाल
अस्पताल में सुरक्षा गार्ड, सीसीटीवी और प्रशासनिक अमला होने के बावजूद दलालों का खुलेआम सक्रिय रहना प्रशासनिक कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो दलालों पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जा सकता है।
कड़ी कार्रवाई की मांग
मरीजों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि अस्पताल परिसर में सक्रिय दलालों की पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही जिन कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आए, उनके खिलाफ भी विभागीय जांच कर कठोर कदम उठाए जाएं।






