अमृतपुर
प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में बार एसोसिएशन के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन कर सरकार से रजिस्ट्री प्रक्रिया के निजीकरण संबंधी निर्णय को वापस लेने की मांग की। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के नाम पर रजिस्ट्री संबंधी कार्यों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है, जिससे वर्षों से इस कार्य से जुड़े अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक एवं स्टांप विक्रेताओं के समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।
अधिवक्ता प्रभाकरदत्त त्रिवेदी ने कहा कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यदि स्टांप विक्रय एवं दस्तावेज लेखन का कार्य निजी एजेंसियों को सौंपा गया तो इससे न केवल अधिवक्ताओं का कार्य प्रभावित होगा, बल्कि आम जनता को भी विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
प्रदर्शन का नेतृत्व बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने किया। इस दौरान अध्यक्ष विनोद प्रकाश द्विवेदी एडवोकेट, महासचिव गजेंद्र सिंह गहलवार एडवोकेट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पियूष शुक्ला, कनिष्ठ उपाध्यक्ष अनुराग सिंह, उपसचिव रोशन लाल अवस्थी, कोषाध्यक्ष दीपक मिश्रा, ऑडिटर अशोक सक्सेना, पुस्तकालय अध्यक्ष सुनील कुमार यादव सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
अधिवक्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि यदि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था और निजीकरण संबंधी निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रभाकरदत्त त्रिवेदी ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर अधिवक्ता लखनऊ तक पैदल मार्च कर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का कार्य करेंगे।
प्रदर्शन के अंत में अधिवक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।


