पर्यावरणीय शर्तों के साथ बनेगी देश की पहली अर्बन नाइट सफारी
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के लिए बुधवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। लंबे समय से चर्चा में चल रहे कुकरैल नाइट सफारी एवं जूलॉजिकल पार्क प्रोजेक्ट को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिल गई है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की सिफारिशों और कड़ी पर्यावरणीय शर्तों के अधीन इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति प्रदान की। कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पर्यटन परियोजना का रास्ता साफ हो गया है।
करीब 1,500 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाली यह परियोजना देश की पहली अर्बन नाइट सफारी होगी। सरकार का दावा है कि यह नाइट सफारी वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और पर्यटन को नई दिशा देने के साथ-साथ लखनऊ की पहचान को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत करेगी। परियोजना पूरी होने के बाद यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे स्थानीय रोजगार और कारोबार को भी बढ़ावा मिलेगा।
पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि परियोजना का क्रियान्वयन पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किया जाएगा। अदालत ने परियोजना की निगरानी के लिए CEC के एक सदस्य को नियुक्त किया है, जो समय-समय पर निर्माण कार्य और पर्यावरणीय मानकों की समीक्षा करेंगे तथा अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेंगे। यदि किसी भी स्तर पर शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है तो आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।
CEC ने रखीं कई अहम शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने CEC की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए कई महत्वपूर्ण शर्तें लागू की हैं। इनमें सबसे अहम यह है कि लखनऊ चिड़ियाघर को कुकरैल स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। इसके अलावा वन क्षेत्र से गुजरने वाली सड़क को चार लेन के बजाय केवल दो लेन तक सीमित रखा जाएगा, ताकि जंगल और वन्यजीवों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
इसके साथ ही परियोजना में प्रस्तावित ट्राम सेवा, नाइट फॉरेस्ट एक्सपीरियंस और कुछ अन्य गतिविधियों को हटाने का निर्देश दिया गया है। इन गतिविधियों से वन क्षेत्र और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई थी। अदालत ने कहा कि विकास कार्य ऐसे होने चाहिए जिनसे पर्यावरण को अनावश्यक नुकसान न पहुंचे।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर कई आपत्तियां उठाईं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि विकास कार्यों को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे। अदालत ने कहा कि यदि निर्धारित शर्तों का पूरी तरह पालन किया जाता है तो परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार का मानना है कि कुकरैल नाइट सफारी शुरू होने के बाद लखनऊ देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल होगा। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यापार और अन्य सेवा क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि परियोजना के प्रत्येक चरण में CEC के दिशा-निर्देशों और पर्यावरणीय नियमों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। यदि सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में लखनऊ देश की पहली अर्बन नाइट सफारी के रूप में एक नई पहचान हासिल करेगा, जो पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकती है।


