लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू ) ने उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा कदम उठाते हुए हृदय प्रत्यारोपण यानी हार्ट ट्रांसप्लांट सेवा शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। कार्यपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब केजीएमयू का कार्डियो वैस्कुलर थोरैसिक सर्जरी विभाग (सीवीटीयस ) आधिकारिक तौर पर हार्ट ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू करेगा।
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि शुरुआती चरण में पहले पांच मरीजों का हार्ट ट्रांसप्लांट पूरी तरह मुफ्त किया जाएगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर गंभीर हृदय रोगियों को बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है, क्योंकि निजी अस्पतालों में हार्ट ट्रांसप्लांट का खर्च अक्सर 25 लाख से 40 लाख रुपये तक पहुंच जाता है।
केजीएमयू प्रशासन के अनुसार विभाग को आवश्यक लाइसेंस मिल चुका है और अब विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम, ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह सुविधा शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश के मरीजों को दिल्ली, चेन्नई या हैदराबाद जैसे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
चिकित्सकों के मुताबिक हार्ट ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में ब्रेन डेड घोषित मरीज के स्वस्थ हृदय को निकालकर गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे जरूरतमंद मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। इसके लिए बेहद तेज और समन्वित मेडिकल सिस्टम की जरूरत होती है, जिसमें अंग संरक्षण, ग्रीन कॉरिडोर और सुपर स्पेशियलिटी टीम की अहम भूमिका रहती है।
हालांकि केजीएमयू ने अभी हार्ट ट्रांसप्लांट का शुल्क तय नहीं किया है। माना जा रहा है कि शुल्क निर्धारण को लेकर जल्द अलग समिति बनाई जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकारी संस्थान में यह सुविधा किफायती दरों पर शुरू होती है तो प्रदेश के हजारों गंभीर हृदय मरीजों के लिए यह जीवनदान साबित हो सकती है।
उत्तर प्रदेश में हर साल बड़ी संख्या में हार्ट फेलियर के मरीज सामने आते हैं, लेकिन महंगे इलाज और सीमित सुविधाओं के कारण अधिकांश मरीज समय पर प्रत्यारोपण नहीं करा पाते। ऐसे में केजीएमयू की यह पहल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए “गेम चेंजर” मानी जा रही है।
केजीएमयू :अब लखनऊ में होगा हार्ट ट्रांसप्लांट, पहले 5 मरीजों को मुफ्त इलाज


