– विधायक जयदेवी कौशल धरने पर, पूर्व मंत्री कौशल किशोर भी मैदान में
लखनऊ। राजधानी के मोहान तिराहे पर महाराजा मल्हिया पासी स्मृति द्वार हटाए जाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि 22 अप्रैल की रात प्रशासन ने “चोरी-छिपे” कार्रवाई करते हुए स्मृति द्वार को हटवा दिया, जिसके बाद इलाके में आक्रोश भड़क उठा और मामला सियासी तूल पकड़ गया।
घटना के विरोध में विधायक जयदेवी कौशल मौके पर धरने पर बैठ गईं। उनके साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर भी धरने में शामिल हो गए, जिससे मामला और गरमा गया। धरना स्थल पर भारी संख्या में समर्थक जुटे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह स्मृति द्वार समाज की आस्था और पहचान से जुड़ा था, जिसे बिना किसी सार्वजनिक सूचना या संवाद के हटाना सीधे तौर पर भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर रात के अंधेरे में इस कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी?
सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में यूपीएसआईसी के एक अभियंता की भूमिका भी जांच के घेरे में है। किसके आदेश पर यह कार्रवाई हुई, क्या वैध अनुमति थी, और क्यों इतनी जल्दबाजी दिखाई गई—इन सभी पहलुओं की तह तक जाने की मांग तेज हो गई है।
धरना स्थल पर माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। पुलिस बल तैनात है, लेकिन राजनीतिक दबाव और जन आक्रोश के चलते प्रशासन के लिए स्थिति संभालना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
मोहान तिराहे पर स्मृति द्वार हटाने से बवाल, रात में ‘चोरी-छिपे’ कार्रवाई


