कंपिल : वर्षों की मेहनत, इंतजार और त्याग के बाद जब देवेंद्र पाल के हाथ में उत्तर प्रदेश पुलिस के उपनिरीक्षक (लेखा) पद का नियुक्ति पत्र आया तो चेहरे पर खुशी साफ झलक उठी। किसान पिता, मां और पत्नी की आंखें भी खुशी से नम हो गईं। परिवार के लिए यह सिर्फ नियुक्ति पत्र नहीं, बल्कि लम्बे समय से चले आ रहे संघर्ष के पूरा होने का पल था।
क्षेत्र के गंगा किनारे बसे गांव शाहपुर गंगपुर निवासी किसान महिपाल सिंह के बेटे देवेंद्र पाल ने एम.कॉम की पढ़ाई की है। सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए उन्होंने कानपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। करीब नौ-दस वर्ष पहले शादी हुई और बाद में तीन बच्चों की जिम्मेदारी भी आई, लेकिन उन्होंने सरकारी नौकरी हासिल करने का लक्ष्य नहीं छोड़ा। कई वर्षों तक पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ तैयारी जारी रखने के बाद आखिरकार वह दिन आया, जिसका परिवार को लंबे समय से इंतजार था। नियुक्ति पत्र हाथ में आते ही संघर्ष की यादें खुशी में बदल गईं।
“कई बार असफलता मिली, अंतिम चयन के लिए जारी रखा प्रयास*
देवेंद्र इससे पहले भी उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल रहे। जूनियर असिस्टेंट, लेखपाल और विभिन्न विभागों में आशुलिपिक समेत कई पदों की परीक्षाओं में सफलता हासिल की, लेकिन अंतिम चयन सूची में स्थान नहीं बना सके। हर असफलता के बाद उन्होंने फिर तैयारी शुरू की। अंतिम चयन की मंजिल तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। अंततः उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक (लेखा) पद पर चयन हुआ और नियुक्ति पत्र मिलने के साथ वर्षों का इंतजार खत्म हो गया।
*पिता के लिए बेटे की मेहनत का मिला फल*
कृषक पिता महिपाल सिंह ने बेटे के हाथ में नियुक्ति पत्र देखा तो भावुक हो उठे। उन्होंने कहा, “हम किसान लोग हैं, मेहनत और धैर्य ही हमारी पूंजी है। बेटे ने जिम्मेदारियों के बीच भी मेहनत नहीं छोड़ी। आज उसकी मेहनत सफल हुई तो बहुत खुशी है। भगवान का धन्यवाद है।”
*पत्नी बोलीं- वर्षों से इसी दिन का इंतजार था*
पत्नी आरती भी नियुक्ति पत्र मिलने के क्षण भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “जिस चीज का वर्षों से इंतजार था, वह मिल गई। बहुत त्याग और इंतजार के बाद यह खुशी मिली है।”
देवेंद्र का प्रशिक्षण जनपद जालौन में होगा। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार के आंतरिक लेखा परीक्षक (ऑडिटर) पद पर भी उनका अंतिम चयन हो चुका है। किसान परिवार के देवेंद्र के हाथ में नियुक्ति पत्र आने का यह क्षण पूरे परिवार के लिए वर्षों की मेहनत और उम्मीद के पूरा होने का साक्षी बना। गांव में भी उनकी सफलता को लेकर खुशी का माहौल है।


