नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने गुरुवार को दिल्ली में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान नेहा बोरा के बोलने से पहले कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और अभिनेता प्रकाश राज भी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। आयोजकों ने अपने विचार रखते हुए आगामी विरोध प्रदर्शन के उद्देश्यों की जानकारी दी। इस दौरान राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।
अभिजीत दीपके ने सरकार पर साधा निशाना: प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए तिरंगा फहराने को भी अपराध बना रही है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। आयोजकों ने कहा कि वे इन मुद्दों पर विरोध दर्ज कराने के लिए प्रदर्शन करना चाहते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई नारेबाजी के बीच वक्ताओं ने अपनी बात रखी। हालांकि, तिरंगा फहराने को लेकर लगाए गए आरोपों और संबंधित कानूनी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
प्रशांत भूषण बोले- सरकार की बर्बरता जारी रही तो बदलनी होगी: वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि सरकार की बर्बरता जारी रही, तो सरकार बदलनी होगी। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए नागरिक समाज और युवाओं की भूमिका पर जोर दिया। उनके अनुसार, लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई सिविल सोसायटी और युवाओं के नेतृत्व में लड़ी जाएगी। अभिनेता प्रकाश राज की मौजूदगी भी इस कार्यक्रम का हिस्सा रही। प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल लोगों ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं और विरोध प्रदर्शन के माध्यम से अपनी मांगें सामने रखने की बात कही।
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शन पर रोक लगाने से किया इनकार: इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया। CJP ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराकर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। अदालत द्वारा रोक लगाने से इनकार किए जाने का अर्थ अपने आप में प्रदर्शन के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां मिल जाना नहीं है। कार्यक्रम से संबंधित अन्य प्रशासनिक और कानूनी शर्तें लागू हो सकती हैं। ऐसे में प्रदर्शन के आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं की स्थिति संबंधित आधिकारिक आदेशों और निर्देशों के आधार पर स्पष्ट होगी।


