12 अक्टूबर को विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च से जुड़े मामले में गुरुवार को शीर्ष अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी अदालत को डरा-धमकाकर दबाव में नहीं ला सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की कोशिशें बेकार हैं और अदालत इन पर ध्यान नहीं देती।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा, “हमें पता है कि कोर्ट के बाहर क्या कहा जा रहा है और कोर्ट के अंदर क्या कहा जा रहा है। हम किसी काल्पनिक दुनिया में नहीं जी रहे हैं। हमें हर बात की जानकारी है।” उनकी इस टिप्पणी को अदालत के बाहर और भीतर हो रही चर्चाओं के संदर्भ में देखा जा रहा है।
CJI ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर भी सवाल उठाने की बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि संबंधित याचिकाकर्ता को अपने आचरण के बारे में सफाई देनी होगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि अदालत ने किस विशिष्ट आचरण का उल्लेख किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणियों ने विपक्ष के मार्च से जुड़े विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। CJI की टिप्पणी का मुख्य संदेश यह था कि अदालत पर बाहरी दबाव डालने की कोशिशों का न्यायिक प्रक्रिया पर असर नहीं होना चाहिए। मामले में आगे की कार्यवाही और याचिकाकर्ता से मांगी जाने वाली सफाई पर नजर रहेगी।


