लखनऊ: साइबर जालसाजों ने देशभर के पांच राज्यों में अपना मकड़ जाल बना रखा था लेकिन उत्तर प्रदेश की लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस (Lucknow Commissionerate Police) ने फैले साइबर अपराधियों के संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। लखनऊ पुलिस ने लंबी पड़ताल के बाद बुधवार को समिट बिल्डिंग के 11 फ्लोर पर छापा मारा तो खलबली मच गई। लखनऊ पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित साइबर ठगी (Cyber fraud) करने वाले संगठित गिरोह के 119 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 103 लैपटॉप, 177 कॉलिंग मोबाइल फोन, अन्य डिजिटल उपकरण, महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद हुए है।
थाना विभूतिखंड क्षेत्र की समिट बिल्डिंग के 11 वीं मंजिल पर काफी लंबे समय से चल रहे इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का आज पर्दाफाश करते हुए साइबर क्राइम सेल एवं स्थानीय पुलिस ने एक साथ 119 अभियुक्तों को गिरफ्तार करते हुए मौके से 100 लैपटॉप, 99 कंप्यूटर, 116 हेड फोन, 111,लैपटॉप चार्जर, 177 कॉलिंग मोबाइल फोन, 1 बायोमेट्रिक मशीन, 8 वाई फाई इंटरनेट राउटर बरामद किये।
आज रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सिंह सेंगर ने बताया कि अभियुक्त तकनीकी संसाधनों एवं इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर विदेशी नागरिकों विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर फ्रॉड करते थे। गिरोह का नेटवर्क लखनऊ के अलावा देश के पांच से अधिक राज्यों तक फैला हुआ है। इस कंपनी की नेट वर्थ पांच सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की है। काल सेंटर का मालिक विनीत शर्मा ठगी की रकम तीन देशों से होते हुए हवाला के जरिए मंगाता था।
गिरोह के लोग इंटरनेट आधारित कॉलिंग सॉफ्टवेयर एवं अन्य आधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर अमरीकी नागरिकों से संपर्क स्थापित करते थे। उन्होंने बताया कि, प्रतिष्ठित कंपनियों अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, पेपल, नेटफ्लिक्स एवं फेस बुक जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों का अधिकृत प्रतिनिधि या कस्टमर सपोर्ट अधिकारी बताकर उनको विश्वास में लेते हुए उन्हें बताया जाता था कि उनके बैंक खाते , डिजिटल वॉलेट, अथवा व्यक्तिगत पहचान से संबंधित समस्या उत्पन्न हो गई है। जिससे उनके विरुद्ध वित्तीय या कानूनी कार्यवाही की जा सकती है। जब व्यक्ति भयभीत हो जाता था तब फर्जी सरकारी दस्तावेज ई – मेल के माध्यम से भेजे जाते थे।
पुलिस ने बताया यह लोग विदेशी नागरिकों, विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के लोगों को भारत की प्रतिष्ठित कंपनियों एवं सरकारी एजेंसियों के नाम पर ठगते थे। गिरोह गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टो करेंसी और इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी करता था। इसके ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी एवं विक्रम सिंह परमार आदि को गिरफ्तार किया गया है।


