– मृत सुभासपा नेता के परिवार ने खोला मोर्चा
– कमालगंज मे जुएँ के फड़ों से भी गौरव का बताया जा रहा गहरा रिश्ता
फर्रुखाबाद। कमालगंज कस्बे का मुख्य बाजार इन दिनों एक बड़े जमीन घोटाले की वजह से सुर्खियों में है। करीब 10 बीघा कृषि योग्य जमीन पर बिना किसी वैध लेआउट पास कराए खुलेआम प्लाटिंग का खेल चल रहा है। इस पूरे खेल में स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक, इस जमीन का सौदा करीब 50 लाख रुपये नकद एडवांस देकर हुआ था। सौदा करने वाले गौरव गुप्ता और उसके भाई वरुण गुप्ता ने यह जमीन दिवंगत सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी पार्टी नेता रहे उमेश यादव को बेची थी। लेकिन सौदे के बाद विवाद तब खड़ा हुआ जब जमीन तक पहुंच के लिए रास्ता नहीं दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों में तनाव और पंचायत तक की नौबत आ गई थी।
बताया जा रहा है कि कुछ माह पहले हुई पंचायत में समझौते के तहत सौदा निरस्त किया गया। इस दौरान मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले जेएनवी रोड निवासी किशन यादव के माध्यम से करीब 10 लाख रुपये खाते के जरिए दिए गए, जबकि शेष रकम बाद में देने की बात तय हुई। एग्रीमेंट रद्द कर जमीन वापस कर दी गई थी।
लेकिन घटनाक्रम ने उस समय नाटकीय मोड़ ले लिया जब कुछ ही दिनों बाद उमेश यादव की गंभीर बीमारी के चलते असामयिक मृत्यु हो गई। इसके बाद जैसे ही जमीन वापस गौरव गुप्ता और उसके भाई के कब्जे में आई, उन्होंने बिना किसी अनुमति के उसी जमीन पर अवैध प्लाटिंग शुरू कर दी।
सबसे बड़ा आरोप यह है कि समझौते के तहत दिए गए 10 लाख रुपये भी अब तक वापस नहीं किए गए। जब इस रकम की मांग की गई तो गौरव गुप्ता ने कथित तौर पर यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उसने प्रतिष्ठित “गुरुजी की बेटी की शादी में लाखों रुपये खर्च कर दिए”, गाड़ी खरीद कर दे दी,अब किसी को जो करना है कर ले।
इस पूरे मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मृतक नेता के परिजनों ने प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। परिवार का आरोप है कि यह सिर्फ जमीन का विवाद नहीं, बल्कि सुनियोजित आर्थिक ठगी और नियमों की खुली धज्जियां उड़ाने का मामला है।उधर किशन यादव की भी त्योंरी चढ़ी हैं, वहीं पीड़ित गुरु जी के खिलाफ भी कार्यवाही की बात कह रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कमालगंज क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग का यह कोई पहला मामला नहीं है। बिना नक्शा पास कराए, बिना सड़क और बुनियादी सुविधाओं के, कृषि भूमि को काटकर बेचा जा रहा है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह खेल करोड़ों के घोटाले में बदल सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में कार्रवाई करेगा या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।


