प्रशांत कटियार
लखनऊ।कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो अपनी पहचान पद से नहीं, बल्कि अपने कर्म, संघर्ष और समाज के प्रति समर्पण से बनाते हैं। लखनऊ के अपर आयुक्त डॉ. राकेश कुमार पटेल ऐसा ही एक नाम हैं, जिनकी सफलता आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। महाराजगंज जिले की मिट्टी से निकलकर पीसीएस ऑफिसर से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) जैसे प्रतिष्ठित पद तक पहुंचना उनकी अथक मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति और समाज के प्रति समर्पण का परिणाम है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय और जेएनयू नई दिल्ली से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद डॉ. पटेल ने प्रशासनिक सेवा में अपनी कार्यकुशलता, ईमानदारी और संवेदनशीलता का ऐसा परिचय दिया, जिसने उन्हें आम अधिकारियों से अलग पहचान दिलाई। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो, तो किसी भी पृष्ठभूमि का व्यक्ति सफलता के सर्वोच्च शिखर तक पहुंच सकता है।
डॉ. पटेल को करीब से जानने वाले बताते हैं कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने हमेशा मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। लोगों की समस्याओं को सुनना, उन्हें समझना और समाधान के लिए व्यक्तिगत रुचि लेना उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
देवरिया में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) के रूप में कार्य करते समय उन्होंने जिस दूरदर्शिता और संवेदनशीलता का परिचय दिया, वह आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है। कोरोना महामारी के कठिन दौर में जब हजारों प्रवासी मजदूर रोजगार की तलाश में अपने गांव लौटे थे, तब उन्होंने केवल सरकारी योजनाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने मनरेगा के माध्यम से मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया और विलुप्त हो चुकी स्याही नदी के पुनर्जीवन का अभियान शुरू किया।
इस अभियान ने एक साथ दो बड़े कार्य किए। एक ओर मजदूरों को रोजगार मिला और उनके परिवारों के घरों में चूल्हा जला, वहीं दूसरी ओर वर्षों से उपेक्षित पड़ी स्याही नदी में फिर से जीवन लौटने लगा। यह केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं थी, बल्कि एक ऐसे अधिकारी की सोच थी जो विकास और पर्यावरण दोनों को समान महत्व देता है।
डॉ. राकेश कुमार पटेल की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सादगी और विनम्रता है। ऊंचे पदों पर पहुंचने के बावजूद उनके व्यवहार में कभी अहंकार नहीं दिखता। उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति सम्मान और आत्मीयता का अनुभव करता है। यही कारण है कि वे केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में बसने वाले जनसेवक के रूप में पहचाने जाते हैं।
आज उनका आईएएस बनना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन तमाम युवाओं के सपनों की जीत है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य हासिल करने का साहस रखते हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि संकल्प मजबूत हो और मेहनत ईमानदार हो, तो सफलता अवश्य मिलती है।
महाराजगंज की धरती आज अपने इस सपूत पर गर्व कर रही है। डॉ. राकेश कुमार पटेल की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी और यह बताती रहेगी कि सेवा, संवेदना और समर्पण के रास्ते पर चलकर कोई भी व्यक्ति समाज और राष्ट्र के लिए मिसाल बन सकता है।


