लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किसानों के मुद्दे को लेकर पार्टी की आगामी नीतियों और घोषणापत्र के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने पूर्ववर्ती कार्यकाल में किसानों के हित में कई फैसले लिए थे और आने वाले समय में भी किसानों से जुड़ी कई बातें पार्टी के मैनिफेस्टो में शामिल की जाएंगी।
अखिलेश यादव ने किसानों के कर्ज का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ किए जा सकते हैं तो किसानों को भी राहत मिलनी चाहिए। यह उनका राजनीतिक दावा है; कर्जमाफी के आंकड़ों और ‘माफी’ तथा बैंकिंग व्यवस्था में तकनीकी रूप से अलग-अलग श्रेणियों के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
अखिलेश यादव ने हाल में किसानों को लेकर कई प्रस्तावों का उल्लेख किया है। 30 सितंबर 2026 को उन्होंने कहा था कि सपा सरकार बनने पर सिंचाई मुफ्त करने और गन्ने का भुगतान 24 से 48 घंटे के भीतर कराने का प्रस्ताव होगा। उन्होंने यह भी कहा था कि घोषणापत्र आने पर किसानों के पक्ष में और फैसले सामने आएंगे।
किसानों के कर्जमाफी का मुद्दा अखिलेश यादव पहले भी चुनावी अभियानों में उठा चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने किसानों का कर्ज माफ करने और एमएसपी को कानूनी अधिकार देने की बात कही थी।
केंद्र सरकार द्वारा संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, कृषि ऋण का कुल बकाया 2019-20 में ₹20.59 लाख करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹33.53 लाख करोड़ हो गया था। यह आंकड़ा कृषि ऋण के बकाये को दर्शाता है, इसे सीधे किसानों की कर्जमाफी का आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
वहीं, उद्योग क्षेत्र के कर्ज को लेकर ‘राइट-ऑफ’ और वास्तविक कर्जमाफी के बीच अंतर भी महत्वपूर्ण है। इसलिए राजनीतिक बयानों में इस्तेमाल होने वाली कर्जमाफी की रकम की तुलना करते समय बैंकिंग और सरकारी आंकड़ों की श्रेणियों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा की राजनीति में किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता मिलती दिखाई दे रही है। अखिलेश यादव ने हालिया बयानों में सिंचाई, गन्ना भुगतान, कृषि लागत और कर्ज जैसे मुद्दों का उल्लेख किया है।


