प्रधानाचार्य के समर्थन में बच्चों की नारेबाजी से गरमाया माहौल, ट्रैक्टर से लाने के आरोप पर एसडीएम सख्त; सात लोग पाबंद, शिक्षकों और रसोइयों पर कार्रवाई के निर्देश
अमृतपुर
बाढ़ के पानी के बीच उच्च प्राथमिक विद्यालय बिरसिंहपुर के करीब एक सैकड़ा छात्र-छात्राओं के बुधवार दोपहर अचानक तहसील मुख्यालय अमृतपुर पहुंचने से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। नाबालिग बच्चे उपजिलाधिकारी कार्यालय के पास पहुंचकर विद्यालय की प्रधानाचार्य नीलम राठौर के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के तहसील पहुंचने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया।
प्रशासन को जानकारी मिली कि बच्चों को कथित रूप से ट्रैक्टर के जरिए तहसील तक लाया गया। इस पर उपजिलाधिकारी अमृतपुर श्वेता साहू ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि नाबालिग बच्चों को जोखिम में डालकर इस तरह वाहन से लाना गंभीर लापरवाही है। मामले में जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
तहसील परिसर में बच्चों ने प्रशासन के सामने कहा कि उन्हें कोई जबरदस्ती नहीं लाया गया और वे अपनी इच्छा से प्रधानाचार्य के समर्थन में यहां पहुंचे हैं। विद्यार्थियों ने प्रधानाचार्य के समर्थन में नारेबाजी की। कुछ बच्चों ने ग्रामीणों पर प्रधानाचार्य को कथित रूप से परेशान और ब्लैकमेल करने के आरोप भी लगाए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
बताया गया कि हाउस कैप्टेन तान्या, आदर्श और वाइस कैप्टेन तनु की अगुवाई में छात्र-छात्राएं तहसील पहुंचे थे। बच्चों के साथ कुछ अभिभावक और ग्रामीण भी मौजूद रहे। इनमें बीडीसी सदस्य बताए जा रहे रनजीत सिंह उर्फ लल्ला समेत कई लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया कि करीब एक सैकड़ा नाबालिग बच्चे एक साथ विद्यालय से निकलकर तहसील तक कैसे पहुंच गए। यदि बच्चों को ट्रैक्टर से लाया गया तो वाहन की व्यवस्था किसने की? बाढ़ के पानी के बीच बच्चों को जोखिम में डालकर तहसील तक लाने का निर्णय किसने लिया? क्या विद्यालय के जिम्मेदार शिक्षकों को इसकी जानकारी थी? प्रशासन अब इन्हीं बिंदुओं की जांच कर रहा है।
मामले में प्रशासन ने सात लोगों को पाबंद किए जाने की कार्रवाई की है। अधिकारियों ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जांच में जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी फर्रुखाबाद विश्वनाथ सिंह ने मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में बिना सूचना बच्चों को तहसील ले जाने या उन्हें गुमराह करने की बात सामने आती है तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। विद्यालय के रसोइयों की भूमिका सामने आने पर उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
घटना के समय विद्यालय में ड्यूटी पर तैनात शिक्षकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चों के विद्यालय से निकलने की जानकारी शिक्षकों को थी या नहीं और उन्हें रोकने का प्रयास किया गया था या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के बजाय कुछ लोगों द्वारा उन्हें विद्यालय की ड्रेस पहनाकर सीधे तहसील पहुंचाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि जांच में यह बात सही पाई जाती है तो नाबालिग बच्चों को किसी विवाद या राजनीतिक गतिविधि में इस्तेमाल किए जाने का मामला और गंभीर हो सकता है।
पूरे घटनाक्रम ने गांव की राजनीति और विद्यालय के विवाद को चर्चा में ला दिया है। बाढ़ के पानी के बीच बच्चों को तहसील तक लाने से उनकी सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। प्रशासन ने बच्चों को सुरक्षित वापस भेजने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल एसडीएम और शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि बच्चे वास्तव में अपनी इच्छा से तहसील पहुंचे थे या उन्हें किसी के कहने पर यहां लाया गया। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ या लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


