नई दिल्ली/एवियन। कनाडा में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता ने भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने का संकेत दिया है। करीब 16 महीने बाद आमने-सामने हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी देखने को मिली और रणनीतिक, आर्थिक तथा सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा हुई।
बैठक के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि भले ही दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक सुरक्षा संधि नहीं है, लेकिन यदि उनके राष्ट्रपति रहते भारत पर किसी प्रकार का हमला होता है तो अमेरिका भारत की मदद के लिए खड़ा रहेगा। ट्रंप का यह बयान वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती रणनीतिक अहमियत और दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों का संकेत माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्रंप के साथ बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि पिछले वर्ष वाशिंगटन में हुई मुलाकात के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में नई गति और नई ऊर्जा आई है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की टीमें मिलकर तय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तेजी से काम कर रही हैं और रक्षा, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
जी-7 सम्मेलन के दौरान हुई यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को वैश्विक स्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रंप के बयान को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है। इस मुलाकात से रक्षा सहयोग, निवेश, अत्याधुनिक तकनीक, आतंकवाद विरोधी अभियानों और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के क्षेत्रों में दोनों देशों के रिश्ते और अधिक गहरे हो सकते हैं। जी-7 मंच पर मोदी और ट्रंप की यह मुलाकात वैश्विक राजनीति की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जा रही है।


