इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री से वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर गंभीरता से विचार करने को कहा है। अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है जब विभागों में होने वाली चूकों, लापरवाही और गलत कार्यों के लिए केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि शीर्ष अधिकारियों और वरिष्ठ अफसरों को भी जिम्मेदार ठहराया जाए। अदालत की यह टिप्पणी प्रशासनिक जवाबदेही और सुशासन के मुद्दे पर बेहद अहम मानी जा रही है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कई मामलों में विभागीय स्तर पर गंभीर त्रुटियां सामने आती हैं, लेकिन उनकी जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती। अक्सर अधीनस्थ कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को समाप्त कर दिया जाता है, जबकि संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जवाबदेही से बच जाते हैं। अदालत का मानना है कि ऐसी व्यवस्था प्रशासनिक सुधारों में बाधा बनती है और इससे जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया कमजोर होती है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी विभाग में गंभीर लापरवाही या कानून के उल्लंघन जैसी स्थिति सामने आती है तो केवल विभागीय कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों की व्यक्तिगत और आपराधिक जिम्मेदारी तय करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। अदालत के अनुसार इससे अधिकारियों में जवाबदेही की भावना बढ़ेगी और प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनेगी।
न्यायालय ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक और जिम्मेदारी तय करने का प्रश्न उठा था। कोर्ट ने कहा कि शासन और प्रशासन के उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को यह समझना होगा कि उनके अधीन कार्य करने वाले कर्मचारियों की कार्यशैली और निर्णयों की अंतिम जिम्मेदारी भी काफी हद तक उन्हीं पर होती है। इसलिए जवाबदेही की व्यवस्था को शीर्ष स्तर तक ले जाना आवश्यक है।


