– मुख्य आरोपी पप्पू कोरी की फांसी बदली आजीवन कारावास में
– वकील विनोद श्रीवास्तव और उषा श्रीवास्तव की दलीलों के बाद निर्णय
प्रयागराज, फर्रुखाबाद । इंस्पेक्टर राजकुमार सिंह हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय के मृत्युदंड संबंधी फैसले में बड़ा बदलाव किया है। हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी पप्पू कोरी की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया है। हाईकोर्ट का फैसला न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना और न्यायमूर्ति अजय भनोट की खंडपीठ ने सुनाया।
फैसले के महत्वपूर्ण हिस्से में हाईकोर्ट ने आरोपी की उम्र 51 वर्ष होने का उल्लेख किया। अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद जेल संबंधी रिपोर्ट पर गौर करते हुए कहा कि उससे यह प्रदर्शित नहीं होता कि आरोपी अभी भी आपराधिक व्यवहार जारी रखे हुए है। इसके विपरीत रिपोर्ट में उसके स्वभाव को शांत एवं सामान्य बताया गया है।
अदालत ने यह भी दर्ज किया कि आरोपी अपने माता-पिता की 6 संतानों में से एक है और उसकी पारिवारिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को भी सजा के प्रश्न पर विचार करते समय ध्यान में रखा गया।
हाईकोर्ट के आदेश में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी दर्ज है कि संबंधित कृत्य अचानक उत्पन्न हुए आवेश में हुआ था। अदालत ने इसी तरह आरोपी की उम्र, जेल में आचरण और अन्य परिस्थितियों को समग्र रूप से देखते हुए मृत्युदंड को बरकरार रखने के बजाय उसे आजीवन कारावास में बदलने का निर्णय लिया।
इस मामले में निचली अदालत ने पप्पू कोरी को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसके विरुद्ध हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दाखिल की गई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मामले में मृत्युदंड को संशोधित करते हुए आजीवन कारावास कर दिया।
इस फैसले के साथ जिला न्यायालय द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा समाप्त होकर आजीवन कारावास में बदल गई।
फैसले के अंतिम पैरा में हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की पैरवी की विशेष प्रशंसा की। अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनोद कुमार श्रीवास्तव, उनकी सहायता के लिए अधिवक्ता उषा श्रीवास्तव तथा लाल चंद्र मिश्रा उपस्थित रहे, जबकि राज्य की ओर से एजीए-1 पारितोष मालवीय ने पक्ष रखा।
अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों ने उत्कृष्ट तैयारी, निष्पक्षता और पेशेवर मर्यादा के साथ अपना पक्ष रखा। संबंधित वैधानिक प्रावधानों और न्यायिक निर्णयों पर आधारित शोधपूर्ण दलीलों ने अदालत को न्यायसंगत एवं उचित निर्णय तक पहुंचने में सहायता की। हाईकोर्ट ने अधिवक्ताओं के उच्च स्तर की वकालत की भी सराहना की।


