प्रयागराज। सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती-2025 की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम और आरक्षण व्यवस्था को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। अदालत ने कहा कि आयोग की ओर से दाखिल हलफनामा पूर्व में दिए गए निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन करता हुआ प्रतीत नहीं होता।
सुनवाई के दौरान अदालत का मुख्य जोर खुली श्रेणी की मेरिट सूची और आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों को लेकर रहा। न्यायालय ने आयोग से पूछा कि खुली श्रेणी की मेरिट तैयार करते समय केवल अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को ही शामिल किया गया था या सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को उनकी योग्यता के आधार पर खुली श्रेणी में स्थान दिया गया।
हाईकोर्ट ने आयोग से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि खुली श्रेणी की सूची किस आधार पर तैयार की गई। अदालत ने आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थियों की मेरिट को लेकर भी सवाल उठाया, जिन्होंने अपनी योग्यता के आधार पर उच्च अंक प्राप्त किए हैं।
न्यायालय ने यह जानना चाहा कि क्या ऐसे मेधावी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को भी खुली श्रेणी की मेरिट में स्थान दिया गया अथवा उन्हें केवल उनके आरक्षित वर्ग की सीटों तक सीमित रखा गया। अदालत के इन सवालों से भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण लागू करने के तरीके पर सुनवाई की गंभीरता साफ दिखाई दी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से प्रस्तुत हलफनामा पूर्व में दिए गए निर्देशों का पूर्ण रूप से अनुपालन करता हुआ नहीं दिख रहा है। इसके बाद न्यायालय ने आयोग को आवश्यक बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी के साथ अगला हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
मामले में अगली सुनवाई 21 अगस्त को सुबह 10 बजे होगी। उस दिन आयोग को अदालत के निर्देश के अनुसार अपना पक्ष और अधिक स्पष्ट रूप से रखना होगा।
यह मामला सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती-2025 की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है। याचिका पंकज वर्मा और दो अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण व्यवस्था और मेरिट निर्धारण को लेकर आपत्तियां उठाई गई हैं।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और अवनीश त्रिपाठी अदालत में पेश हुए।


