– इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला
प्रयागराज। लगभग 49 वर्ष पुराने रिश्वतखोरी के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दोषी लेखपाल को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई एक वर्ष के कारावास की सजा को बरकरार रखा है।
मामला वर्ष 1977 का है, जब तत्कालीन लेखपाल पर ₹300 रिश्वत लेने का आरोप लगा था। मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।
इस फैसले को चुनौती देते हुए लेखपाल ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी और सजा को बरकरार रखा।
अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार दोष सिद्ध होने पर सजा में हस्तक्षेप का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। इस फैसले को भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


