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Friday, July 10, 2026

करियर के साथ मातृत्व, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों को भी दें समान महत्व: आनंदीबेन पटेल

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कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के 41वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को संबोधित करते हुए शिक्षा, आत्मनिर्भरता, मातृत्व और पारिवारिक मूल्यों के संतुलन पर विस्तृत विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि जिम्मेदार नागरिक और सशक्त समाज के निर्माण का आधार भी है।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि छात्राओं को आईएएस, शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए, लेकिन इसके साथ-साथ उन्हें भविष्य में एक “एक्सपर्ट मदर” बनने की तैयारी भी करनी चाहिए। उनका कहना था कि एक मां ही बच्चे की पहली गुरु होती है और उसके संस्कार, व्यक्तित्व तथा भविष्य के निर्माण में उसकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा और तकनीकी दक्षता के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए। परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है और मजबूत परिवार ही मजबूत समाज और राष्ट्र की नींव रखते हैं। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल आर्थिक सफलता नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों का विकास भी होना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि प्रत्येक महिला को जीवनोपयोगी कौशल भी आने चाहिए। उन्होंने कहा कि खाना बनाना केवल घरेलू कार्य नहीं, बल्कि परिवार के स्वास्थ्य, पोषण और देखभाल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कौशल है। उनके अनुसार, आत्मनिर्भरता का अर्थ जीवन के हर क्षेत्र में सक्षम होना है।

अपने संबोधन में उन्होंने बेटियों को आत्मनिर्भर, शिक्षित और संस्कारी बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि बेटियों को ऐसा वातावरण मिले, जहां वे आत्मविश्वास के साथ अपने निर्णय ले सकें, चुनौतियों का सामना कर सकें और मानसिक रूप से मजबूत बन सकें।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि डिग्री प्राप्त करने के बाद उनका दायित्व और बढ़ जाता है। उन्हें अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों की उपस्थिति रही। समारोह के दौरान विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को उपाधियां और मेधावी छात्र-छात्राओं को पदक एवं सम्मान भी प्रदान किए गए।

राज्यपाल ने अपने संबोधन का समापन विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए किया और कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब वह व्यक्ति को बेहतर इंसान, जिम्मेदार नागरिक और समाज के प्रति संवेदनशील बनाती है।

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