फर्रुखाबाद, कायमगंज। गल्ला मंडी में बड़ी मात्रा में खराब हालत में पड़े गेहूं को लेकर स्थानीय लोगों और किसानों में नाराजगी देखने को मिल रही है। मंडी परिसर में खुले स्थान पर रखे गेहूं के खराब होने की चर्चा के बाद खाद्यान्न भंडारण और वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय पर उचित रखरखाव नहीं किया गया तो अनाज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
मंडी में मौजूद कुछ किसानों और व्यापारियों का आरोप है कि लंबे समय से खुले में पड़े गेहूं में नमी और खराबी आने लगी है। कई स्थानों पर गेहूं के ढेरों में रंग परिवर्तन और दुर्गंध जैसी स्थिति देखे जाने की बात कही जा रही है। इसे लेकर स्थानीय लोगों ने चिंता जताई कि खराब अनाज यदि सार्वजनिक वितरण प्रणाली तक पहुंचा तो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि सरकार गरीबों और जरूरतमंदों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, इसलिए भंडारण व्यवस्था में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। किसानों ने मांग की है कि मंडी में रखे गेहूं की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और खराब अनाज को अलग किया जाए, ताकि वितरण व्यवस्था प्रभावित न हो।
लोगों ने यह भी मांग उठाई कि खाद्यान्न भंडारण केंद्रों पर नियमित निरीक्षण की व्यवस्था मजबूत की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो अनाज की बर्बादी के साथ-साथ जनस्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, भंडारण व्यवस्था को दुरुस्त करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से मामले की जानकारी लेकर जांच कराने की बात कही जा रही है।
मंडी में खराब गेहूं मिलने से उठे सवाल, राशन व्यवस्था की निगरानी पर जोर


