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Tuesday, May 12, 2026

पार्कों में रातभर डीजे और शोर पर हाईकोर्ट का बड़ा प्रहार, सरकार को व्यवस्था बदलने का आदेश

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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजधानी लखनऊ समेत पूरे उत्तर प्रदेश में पार्कों के व्यावसायिक इस्तेमाल और देर रात तक चलने वाले तेज आवाज वाले आयोजनों पर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि सार्वजनिक पार्क मनोरंजन और पर्यावरण संरक्षण के लिए हैं, उन्हें “कमाई का अड्डा” नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने रात 10 बजे के बाद डीजे और तेज ध्वनि वाले आयोजनों पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विकास प्राधिकरणों को आदेश दिया है कि पार्कों में होने वाले व्यावसायिक कार्यक्रमों की पूरी व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लगातार बढ़ता ध्वनि प्रदूषण लोगों के मौलिक अधिकारों और स्वास्थ्य पर सीधा हमला है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर इसका गंभीर असर पड़ता है।

सूत्रों के मुताबिक, राजधानी लखनऊ समेत कई शहरों में पार्कों को शादी, निजी पार्टियों, राजनीतिक आयोजनों और DJ नाइट्स के लिए किराये पर दिए जाने की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं। देर रात तक तेज आवाज में संगीत बजने से आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की नींद, पढ़ाई और स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा था। कई मामलों में स्थानीय प्रशासन और प्राधिकरणों पर नियमों को नजरअंदाज कर “राजस्व कमाने” के आरोप भी लगे।

हाईकोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ध्वनि प्रदूषण लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्टों के अनुसार, आवासीय क्षेत्रों में निर्धारित ध्वनि सीमा रात के समय 45 डेसिबल होनी चाहिए, लेकिन बड़े आयोजनों में डीजे की आवाज कई बार 90 से 100 डेसिबल तक पहुंच जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार तेज ध्वनि सुनने से हाई ब्लड प्रेशर, तनाव, अनिद्रा और सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

अदालत के आदेश के बाद अब नगर निगम, विकास प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। क्या अब तक नियमों की अनदेखी कर पार्कों को कमाई का जरिया बनाया जाता रहा? क्या राजनीतिक और रसूखदार आयोजनों को खुली छूट दी जाती रही? इन सवालों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।

युवा वर्ग और स्थानीय नागरिकों के बीच भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों का उद्देश्य लोगों को स्वच्छ वातावरण देना है, न कि रातभर शोर और भीड़ से परेशान करना। वहीं इवेंट कारोबार से जुड़े लोग इस फैसले को अपने व्यवसाय पर असर डालने वाला बता रहे हैं।

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