– स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नें दिलाई जगह जगह गो रक्षा की शपथ
लखनऊ/वाराणसी। गौ रक्षा को लेकर देशभर में चल रही राजनीति के बीच ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सरकारों पर तीखा हमला बोला है। गौ माता के मुद्दे पर यूथ इंडिया के मुख्य संपादक शरद कटियार से विशेष वार्ता में शंकराचार्य ने कहा कि “गौ माता के नाम पर वोट मांगने वाले आज बताएं कि हजारों गायें सड़कों पर क्यों भटक रही हैं, गौशालाओं में भूख और बीमारी से मौतें क्यों हो रही हैं और किसान आवारा गोवंश से क्यों त्रस्त है?”
उन्होंने कहा कि गौ माता केवल चुनावी भाषणों का विषय बनकर रह गई है, जबकि धरातल पर गोवंश की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
यूथ इंडिया: गुरुदेव, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार स्वयं को गौ संरक्षण के लिए सबसे प्रतिबद्ध बताती है। फिर आप लगातार सवाल क्यों उठा रहे हैं?
शंकराचार्य: क्योंकि संत का धर्म सत्ता की आरती उतारना नहीं, सत्य बोलना है। यदि गौ माता सुरक्षित है तो फिर गांव-गांव किसान रातभर खेतों की रखवाली क्यों कर रहा है? यदि गौशालाएं आदर्श हैं तो वहां से लगातार अव्यवस्थाओं की खबरें क्यों आती हैं? सरकार को विज्ञापन नहीं, जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गाय को माता कहने और गाय को माता मानने में अंतर होता है। जो वास्तव में माता मानता है, वह उसकी रक्षा भी करता है।
यूथ इंडिया: क्या आपको लगता है कि गौ रक्षा के नाम पर राजनीति अधिक और काम कम हुआ है?
शंकराचार्य: इसमें कोई संदेह नहीं है। गौ माता देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी बन गई है। चुनाव आते हैं तो गौ माता याद आती है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वही गाय सड़कों पर छोड़ दी जाती है। यह सनातन संस्कृति का अपमान है।
उन्होंने कहा कि गौ रक्षा केवल नारे, पोस्टर और भाषणों से नहीं होगी। इसके लिए राष्ट्रीय नीति, कठोर कानून और जवाबदेह व्यवस्था चाहिए।
यूथ इंडिया: आपने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी गौ रक्षा के मुद्दे पर कठघरे में खड़ा किया है?
शंकराचार्य: योगी जी गोरक्षपीठ से आते हैं, इसलिए उनसे अपेक्षाएं भी सबसे अधिक थीं। जब अपेक्षा बड़ी होती है तो प्रश्न भी बड़े होते हैं। मैं व्यक्ति नहीं, व्यवस्था पर सवाल उठा रहा हूं। यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी गोवंश सुरक्षित नहीं है तो समीक्षा होनी चाहिए।
यूथ इंडिया: सरकार कहती है कि हजारों करोड़ रुपये गौ संरक्षण पर खर्च किए जा रहे हैं।
शंकराचार्य: जनता जानना चाहती है कि खर्च का परिणाम क्या निकला? यदि बजट बढ़ा है तो गायों की हालत क्यों नहीं सुधरी? यदि योजनाएं सफल हैं तो आवारा गोवंश की समस्या खत्म क्यों नहीं हुई? केवल आंकड़ों से वास्तविकता नहीं बदलती।
यूथ इंडिया: गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की आपकी मांग कितनी गंभीर है?
शंकराचार्य: यह केवल धार्मिक मांग नहीं है, यह सांस्कृतिक मांग है। जिस देश की सभ्यता हजारों वर्षों से गाय को माता मानती आई हो, वहां उसे सम्मानजनक संवैधानिक संरक्षण मिलना चाहिए। सरकारें यदि वास्तव में गौभक्ति का दावा करती हैं तो इस दिशा में निर्णायक कदम उठाएं।
देश में गौ माता के नाम पर दशकों से राजनीति होती रही है। लेकिन आज भी गांवों से लेकर शहरों तक आवारा गोवंश बड़ी समस्या बना हुआ है। सड़क दुर्घटनाओं से लेकर किसानों की फसलों तक, गोवंश से जुड़ी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे समय में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का यह बयान सीधे सत्ता प्रतिष्ठान को कठघरे में खड़ा करता है।
सवाल केवल इतना नहीं है कि गौ माता पर कितना बजट खर्च हुआ। असली सवाल यह है कि क्या गौ माता वास्तव में सुरक्षित है?
यदि उत्तर “हां” है तो फिर सड़कों पर भटकती गायें किसकी जिम्मेदारी हैं?
यदि उत्तर “नहीं” है तो फिर गौ माता के नाम पर राजनीति करने वालों को जनता के सामने जवाब देना होगा।
गौ माता आस्था का विषय है, लेकिन उससे भी बड़ा विषय है जवाबदेही। और यही सवाल आज शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पूरे देश से पूछ रहे हैं।


