शरद कटियार
उत्तर प्रदेश कैबिनेट के 24 प्रस्तावों को मंजूरी मिलना केवल प्रशासनिक फैसलों की सूची नहीं, बल्कि सरकार की विकास नीति और प्राथमिकताओं का संकेत भी है। इन फैसलों में सामाजिक कल्याण, युवा सशक्तीकरण, डिजिटल शिक्षा, आधुनिक परिवहन, उद्योग और बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर दिखाई देता है।
60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को परिवहन निगम की बसों में आजीवन मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का फैसला सामाजिक सरोकार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे बुजुर्ग महिलाओं को आवागमन में आर्थिक राहत मिलेगी। हालांकि, योजना को सफल बनाने के लिए उम्र प्रमाणित करने की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त रखना जरूरी होगा।
युवाओं के लिए 25 लाख मुफ्त टैबलेट खरीदने का निर्णय भी स्वागत योग्य है। आज शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर तेजी से डिजिटल माध्यमों से जुड़ रहे हैं। ऐसे में टैबलेट विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई और कौशल विकास का उपयोगी माध्यम बन सकता है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उपकरण सही पात्रों तक समय पर पहुंचें और उनका प्रभावी उपयोग हो।
250 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद से सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद मिल सकती है। वहीं सुल्तानपुर में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है। गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तार देने की योजना भी उत्तर प्रदेश को पश्चिमी उत्तराखंड से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक और धार्मिक गलियारे के रूप में विकसित कर सकती है।
जेपीएनआईसी को निजी क्षेत्र को 30 वर्ष की लीज पर देने का फैसला सरकारी संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग की नीति को दर्शाता है। ऐसे निर्णयों में पारदर्शिता, सार्वजनिक हित और संपत्ति के दीर्घकालिक मूल्य का संरक्षण जरूरी है।
कुल मिलाकर कैबिनेट के फैसलों में सामाजिक कल्याण से लेकर युवा विकास, परिवहन, उद्योग और कनेक्टिविटी तक कई क्षेत्रों को साधने का प्रयास है। अब असली परीक्षा इन घोषणाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की है। योजनाएं जितनी तेजी और पारदर्शिता से जमीन पर उतरेंगी, जनता को उतना ही वास्तविक लाभ मिलेगा।


