– आपराधिक छवि वालों के शस्त्र लाइसेंस पर चलेगा बड़ा अभियान
– डीएम मैडम लाठर की टेड़ी नजर
– अपराधियों पर कोई रहम के मूड में नहीं जिला प्रशासन
फर्रुखाबाद। आपराधिक मुकदमों में लिप्त लोगों को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंस अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की हालिया सख्त टिप्पणियों और निर्देशों के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। सूत्रों के अनुसार जनपद में ऐसे लोगों की सूची तैयार कराई जा रही है जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके पास वैध शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं।
प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि गैंगस्टर, रंगदारी, भूमि कब्जा, हत्या, हत्या के प्रयास और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में नामजद कई लोगों के लाइसेंसों की अब दोबारा समीक्षा होगी। जिला स्तर पर पुलिस और प्रशासन की संयुक्त रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है, जिसके आधार पर लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक माफिया नेटवर्क से जुड़े चर्चित चेहरों के साथ-साथ उनके करीबी सहयोगियों को भी प्रशासन ने रडार पर लिया है। विशेष रूप से चर्चित माफिया अनुपम दुबे से जुड़े लोगों की गतिविधियों और उनके शस्त्र लाइसेंसों का ब्योरा खंगाला जा रहा है। पुलिस खुफिया इकाइयों से भी रिपोर्ट मांगी गई है कि किन लोगों ने लाइसेंस का इस्तेमाल प्रभाव, दबाव और भय का माहौल बनाने में किया।
जिले में यह भी चर्चा तेज है कि कुछ ऐसे लोग, जिनकी छवि लंबे समय से विवादित रही है, उन्होंने राजनीतिक और प्रशासनिक पहुंच के दम पर लाइसेंस हासिल कर लिए थे। अब उच्च न्यायालय के सख्त रुख के बाद प्रशासन उन पुराने रिकॉर्डों को भी खंगाल रहा है जिनमें सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठे थे।
सूत्र यह भी बताते हैं कि आपराधिक प्रवृत्ति से जुड़े कुछ वकीलों को भी चिन्हित किया जा रहा है। प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि कहीं न्यायिक प्रक्रियाओं की आड़ में अपराधी तंत्र को संरक्षण देने वाले तत्व हथियारों के जरिए प्रभाव तो नहीं बना रहे। हालांकि आधिकारिक स्तर पर अभी किसी नाम की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन खुफिया रिपोर्टों के आधार पर सूची लगातार लंबी होती जा रही है।
प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में नोटिस जारी हो सकते हैं। जिन लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे लंबित हैं या जिनकी गतिविधियां कानून-व्यवस्था के लिए खतरा मानी जा रही हैं, उनके लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
जनपद में यह कार्रवाई केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि वर्षों से सक्रिय अपराध-राजनीति गठजोड़ पर चोट के रूप में भी देखी जा रही है। लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि प्रभावशाली अपराधी हथियारों के लाइसेंस का इस्तेमाल अपनी “सामाजिक हैसियत” और दबदबा कायम रखने के लिए करते रहे हैं।


