– कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण पर जनहित में उठाई थी आवाज
– सर्किट हाउस में 22 अस्पताल संचालकों के दबाव में डांटे गए कार्यकर्ता
फर्रुखाबाद के मसेनी और आसपास क्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य मानकों, फर्जी संचालन और मरीजों के शोषण को लेकर आवाज उठाने वाले युवा भाजपा कार्यकर्ताओं पर अब पार्टी संगठन की कार्रवाई ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। जनहित के मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी कर रहे कार्यकर्ताओं के खिलाफ जिला संगठन द्वारा जांच कमेटी गठित किए जाने से भाजपा के भीतर ही असंतोष उभरने लगा है।
सूत्रों के अनुसार मसेनी क्षेत्र में संचालित करीब 22 अस्पताल संचालकों ने एकजुट होकर सदर विधायक सुनील दत्त द्विवेदी से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान अस्पताल संचालकों ने युवा भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को “छवि खराब करने वाला अभियान” बताया गया । इसके बाद दरबार में पहुंचे युवा कार्यकर्ताओं को कड़ी फटकार भी लगाई गई।
मामला केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है। भाजपा के अंदर अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर जनहित से जुड़े सवाल उठाने वाले कार्यकर्ताओं पर ही संगठनात्मक शिकंजा क्यों कसा जा रहा है। मसेनी क्षेत्र में लंबे समय से बिना मानक संचालित अस्पतालों, झोलाछाप चिकित्सा, मनमानी फीस और रेफरल कमीशन जैसे आरोप स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय रहे हैं। कई बार मरीजों के परिजनों ने भी शिकायतें कीं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
युवा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वे केवल स्वास्थ्य विभाग के मानकों के पालन और अवैध अस्पतालों की जांच की मांग कर रहे थे, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते उन्हें ही “अनुशासन” का पाठ पढ़ाया जा रहा है। संगठन की जांच कमेटी बनने के बाद अब कई कार्यकर्ता खुलकर बोलने से बच रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन किसी भी ऐसे विवाद से बचना चाहता है जिससे स्थानीय प्रभावशाली अस्पताल संचालक और उनसे जुड़े आर्थिक नेटवर्क नाराज हों। यही वजह है कि जनसरोकार के मुद्दे को दबाकर कार्यकर्ताओं को “राग दरबारी” की राजनीति की ओर मोड़ने की कोशिश की जा रही है।
भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी कभी भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के खिलाफ आंदोलन से खड़ी हुई थी, लेकिन अब जमीनी मुद्दे उठाने वाले कार्यकर्ताओं को ही कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। इससे संगठन में गलत संदेश जा रहा है और युवा कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है।
फिलहाल जिला संगठन की जांच कमेटी क्या रिपोर्ट देती है और स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या नहीं, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है। लेकिन इतना तय है कि मसेनी के अस्पतालों का मुद्दा अब केवल स्वास्थ्य व्यवस्था का नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर कार्यकर्ता बनाम प्रभावशाली लॉबी की लड़ाई बनता जा रहा है।


