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Saturday, October 10, 2026

शास्त्रीय संगीत की सुरमयी प्रस्तुतियों से गूंजा फर्रुखाबाद, ‘स्वरांजलि’ का 44वां सम्मेलन संपन्न

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फर्रुखाबाद। फर्रुखाबाद की समृद्ध संगीत विरासत को सहेजने और भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ललन पिया-हाजी विलायत अली संगीत अकादमी की ओर से आयोजित 44वां शास्त्रीय संगीत सम्मेलन ‘स्वरांजलि’ शनिवार, 10 अक्टूबर को बद्री विशाल कॉलेज के सभागार में संपन्न हुआ। देश के विभिन्न शहरों से आए प्रतिष्ठित कलाकारों की सुरमयी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में सरोद वादन, तबला वादन, शास्त्रीय गायन, ठुमरी और भजनों की प्रस्तुतियों ने संगीत प्रेमियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया।
फर्रुखाबाद के तीन महान संगीत रत्नों पंडित ललन पिया, उस्ताद हाजी विलायत अली खां और आचार्य कंचन जी की स्मृति को समर्पित सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. मिथिलेश तिवारी और विशिष्ट अतिथि डॉ. रंगनाथ मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमती आस्तिकी मिश्रा की सुमधुर सरस्वती वंदना से हुई। हारमोनियम पर आकर्ष शुक्ला और तबले पर अमन मिश्रा ने संगत की। इसके बाद कार्यक्रम संयोजक आकर्ष शुक्ला ने अकादमी की गतिविधियों और संगीत परंपरा को संरक्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
सम्मेलन में दिल्ली घराने के प्रसिद्ध तबला वादक पंडित सूरज निर्वाण ने अपने स्वतंत्र तबला वादन से श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। उनके साथ दिल्ली से आए सारंगी वादक पंडित पुनीत सिसोदिया ने प्रभावशाली संगत की। इसके बाद जयपुर से आए मैहर सेनिया घराने के डॉ. आकाशदीप ने सरोद पर राग मारवा और मनमोहक धुन प्रस्तुत कर सभागार को सुरों से सराबोर कर दिया। तबले पर पंडित मिहिर कुमार नट्टा ने संगत की।
समापन सत्र में बरेली के वरिष्ठ संगीतज्ञ सुरमणि पंडित अवधेश गोस्वामी ने राग पूरिया कल्याण, ठुमरी और भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। रानीखेत से आए पंडित दीपक राणा ने सहगान किया, जबकि तबले पर पंडित सूरज निर्वाण ने संगत की। कलाकारों की प्रस्तुतियों के दौरान सभागार तालियों से गूंजता रहा।
कार्यक्रम के दौरान फर्रुखाबाद की मूल निवासी और कानपुर में संगीत प्रवक्ता डॉ. नीतू कमठान की पुस्तक ‘संगीत चक्रवली’ का विमोचन मुख्य अतिथि डॉ. मिथिलेश तिवारी ने किया। इस अवसर पर अकादमी की ओर से साहित्य और संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए स्मृति सम्मान भी प्रदान किए गए। आचार्य कंचन स्मृति सम्मान प्रसिद्ध साहित्यकार राम अवतार शर्मा ‘इंदु’ को तथा डॉ. सतीश चंद्र रस्तोगी स्मृति सम्मान वरिष्ठ संगीतज्ञ सुश्री पुष्पलता रस्तोगी को दिया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. मिथिलेश तिवारी ने अकादमी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संगीत की जीवंत परंपरा को आगे बढ़ाना एक बड़ी साधना है। भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी कला एवं परंपराओं से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था अध्यक्ष विनोद कुमार दुबे ने अतिथियों का स्वागत किया। सचिव डॉ. विद्या प्रकाश दीक्षित ने कलाकारों, अतिथियों और उपस्थित संगीत प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन सुरेंद्र पांडेय ने किया।
इस अवसर पर सुरेंद्र सिंह सोमवंशी, डॉ. प्रदीप मोहन माथुर, भूपेंद्र सिंह, विनोद तिवारी, संजय गर्ग, संजीव सोमवंशी, उत्कर्ष अग्निहोत्री, वैभव सोमवंशी, डॉ. अरविंद गुप्ता, आकिब सहित बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी और नगर के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सम्मेलन ने एक बार फिर फर्रुखाबाद की गौरवशाली संगीत परंपरा और शास्त्रीय कला के प्रति लोगों की रुचि को उजागर किया।

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