फर्रुखाबाद। नगर में दिनोंदिन बढ़ती यातायात अव्यवस्था अब विकराल रूप लेती जा रही है। पहले जहां जाम की समस्या केवल मुख्य मार्गों तक सीमित थी, वहीं अब यह समस्या गली-मोहल्लों तक भी पहुंच गई है। संकरी गलियों में वाहनों का दबाव बढ़ने से आम नागरिकों का निकलना तक मुश्किल हो गया है। विशेष रूप से ई-रिक्शा का अनियंत्रित और अनियमित संचालन इस समस्या को और अधिक गंभीर बना रहा है।
नगर के प्रमुख बाजारों और मुख्य सड़कों पर लगने वाले जाम से बचने के लिए अब वाहन चालक वैकल्पिक रास्तों के रूप में गली-मोहल्लों का सहारा ले रहे हैं। इसके चलते इन गलियों में अचानक यातायात का दबाव बढ़ गया है। स्थिति यह है कि जिन रास्तों पर पहले केवल पैदल चलना या साइकिल से निकलना आसान था, वहां अब चार पहिया और ई-रिक्शा तक घुस रहे हैं, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ई-रिक्शा चालकों की मनमानी इस समस्या की मुख्य वजह बन चुकी है। बिना किसी तय रूट और नियम के ये वाहन कहीं भी खड़े हो जाते हैं और सवारियां भरने लगते हैं। इससे न केवल रास्ता बाधित होता है, बल्कि अन्य वाहनों की आवाजाही भी रुक जाती है। कई स्थानों पर तो ई-रिक्शा चालक सड़कों के बीचों-बीच खड़े होकर यात्रियों का इंतजार करते हैं, जिससे जाम की स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
गर्मी और तेज धूप के बीच यह समस्या लोगों के लिए और अधिक परेशानी का कारण बन रही है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं जाम में फंसकर घंटों तक परेशान होते रहते हैं। कई बार एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन भी जाम में फंस जाते हैं, जिससे स्थिति चिंताजनक हो जाती है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में हालात और भी बदतर हो सकते हैं।
नगर के कई मोहल्लों जैसे कि संकरी बस्तियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थिति सबसे अधिक खराब है। यहां पर ई-रिक्शा के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। पार्किंग की समुचित व्यवस्था न होने के कारण लोग अपने वाहन सड़क किनारे खड़े कर देते हैं, जिससे रास्ता और संकरा हो जाता है और जाम लगना आम बात हो गई है।
ट्रैफिक नियमों की अनदेखी भी इस समस्या को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। अधिकांश वाहन चालक नियमों का पालन नहीं करते, जिससे अव्यवस्था और बढ़ जाती है। बिना हेलमेट, बिना लाइसेंस और गलत दिशा में वाहन चलाना आम हो गया है। इसके अलावा, सड़क किनारे अतिक्रमण और अस्थायी दुकानों के कारण भी यातायात बाधित होता है।
प्रशासन द्वारा समय-समय पर जाम से निजात दिलाने के लिए अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन उनका असर स्थायी नहीं हो पाता। कुछ दिन सख्ती के बाद स्थिति फिर से पहले जैसी हो जाती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक ई-रिक्शा संचालन के लिए स्पष्ट नियम और निर्धारित रूट तय नहीं किए जाएंगे, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
नगरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ई-रिक्शा के संचालन पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इसके लिए ई-रिक्शा के लिए निर्धारित स्टैंड बनाए जाएं, रूट तय किए जाएं और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। साथ ही, गली-मोहल्लों में बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए और पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि शहर में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना आवश्यक है। स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, बेहतर सड़क ढांचा और जागरूकता अभियान के माध्यम से ही इस समस्या से निजात पाई जा सकती है।
फिलहाल, नगर के लोग जाम की समस्या से जूझने को मजबूर हैं। यदि प्रशासन और नागरिक मिलकर इस दिशा में प्रयास करें, तो निश्चित रूप से इस समस्या का समाधान संभव है और शहर को जाम मुक्त बनाया जा सकता है।
मुख्य मार्गों से गली-मोहल्लों तक पहुंची जाम की समस्या, शहरवासी बेहाल


