अम्बरपुर में भूमि विवाद को लेकर गरमाया माहौल, किसान नेता और एसडीएम के बीच तीखी नोकझोंक
अमृतपुर
थाना राजेपुर क्षेत्र के ग्राम अम्बरपुर में 40 वर्षों से काबिज भूमि पर कथित कब्जे के विरोध में एक परिवार द्वारा शुरू किया गया आमरण अनशन शनिवार को प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद नया मोड़ ले गया। मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी अमृतपुर ने मामले की जांच कर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद अनशनकारी गिरीश चंद्र मिश्रा को बिगड़ती तबीयत के चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजेपुर में भर्ती कराया गया। ग्राम अम्बरपुर निवासी गिरीश चंद्र मिश्रा का आरोप है कि वह पिछले लगभग चार दशकों से गाटा संख्या 307, रकबा 0.150 हेक्टेयर भूमि पर काबिज हैं। उनका कहना है कि राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों द्वारा उसी भूमि के हिस्से पर गांव के रमाकांत, ओंकार और अरुण को मौखिक रूप से आवंटन कर कब्जा दिला दिया गया, जिससे उनका परिवार आक्रोशित हो गया।
भूमि पर अपने अधिकार की मांग को लेकर गिरीश चंद्र मिश्रा अपनी पत्नी गायत्री देवी, पुत्री सुमन, पुत्र देवेश एवं पुत्रवधू गंगा देवी के साथ शुक्रवार से आमरण अनशन पर बैठे हुए थे। अनशन की सूचना मिलते ही शनिवार को उपजिलाधिकारी रविंद्र कुमार, नायब तहसीलदार अभिषेक सिंह, राजस्व निरीक्षक अतुल कुमार, लेखपाल रविंद्र वर्मा एवं उपनिरीक्षक आशुतोष कुमार मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों की बात सुनी।
जांच के दौरान उपजिलाधिकारी ने बताया कि संबंधित भूमि सरकारी अभिलेखों में दर्ज है, जिस पर वर्तमान में गिरीश चंद्र मिश्रा का कब्जा है। उसी गाटा संख्या में शेष भूमि रमाकांत को आवंटित की गई है। उन्होंने राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध कब्जेदारों के खिलाफ धारा-67 के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा पात्र व्यक्तियों के चयन की प्रक्रिया पूरी कर भविष्य में गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को आवासीय पट्टों का आवंटन किया जाए।इस दौरान भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के मंडल प्रवक्ता रामबरन वर्मा भी अनशन स्थल पर पहुंचे। प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर उनकी उपजिलाधिकारी रविंद्र कुमार से तीखी बहस हुई, जिससे कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।हालांकि बाद में उपजिलाधिकारी द्वारा निष्पक्ष जांच एवं न्याय का भरोसा दिए जाने पर गिरीश चंद्र मिश्रा को उपचार के लिए सीएचसी राजेपुर भेजा गया। वहीं उनकी पुत्री सुमन और पुत्रवधू गंगा देवी ने अपनी मांगों को लेकर अनशन जारी रखने का निर्णय लिया है।ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं और सभी को इस बहुचर्चित भूमि विवाद के समाधान का इंतजार है।


