30 C
Lucknow
Sunday, August 16, 2026

उम्र पर भारी पड़ी आस्था – नन्हे कांवड़ियों ने खींचा ध्यान

Must read

श्रृंगीरामपुर गंगा घाट पर उमड़ा आस्था का सैलाब, छोटे बच्चों के हाथों में गंगाजल देख भावुक हुए श्रद्धालु

कमालगंज, फर्रुखाबाद। सावन के पावन महीने में जब चारों ओर बम-बम भोले के जयकारे गूंज रहे हैं, वहीं फर्रुखाबाद जिले के कमालगंज थाना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक श्रृंगीरामपुर गंगा घाट पर आस्था का अनोखा नजारा देखने को मिला। यहां उम्र आस्था के आगे बौनी साबित हुई। छोटे-छोटे नन्हे-मुन्ने बच्चे कंधे पर कांवड़ और हाथों में गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए तो देखने वाले हर किसी की आंखें भर आईं।

8 से 12 साल के बच्चे गर्मी और बरसात की परवाह किए बिना, नंगे पांव “बोल बम” के जयकारों के साथ कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। एक छोटी बच्ची अपने कंधे पर छोटी कांवड़ लिए आगे-आगे चल रही है, बाल कांवड़िए कंधे पर कांवड़ उठाए शिव की भक्ति में लीन हैं। इन बच्चों का उत्साह बड़े-बड़े कांवड़ियों को भी पीछे छोड़ रहा था।
पावन है यह धरती, जुड़ा है भगवान राम से नाता
श्रृंगीरामपुर घाट सिर्फ एक घाट नहीं, बल्कि एक सिद्ध पीठ है। मान्यता है कि यह वही पावन धरती है जहां भगवान श्री राम की बड़ी बहन शांता के पति और भगवान राम के जीजा श्रृंगी ऋषि का एक सींग टूटकर गिरा था। इसी स्थान पर उनके भक्तों ने उनका मंदिर स्थापित किया। कहा जाता है कि श्रृंगी ऋषि ने ही राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ को संपन्न कराया था, जिसके फलस्वरूप भगवान राम सहित चारों भाइयों का जन्म हुआ था। इसलिए इस घाट का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
यहां का गंगाजल लेकर जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, ऐसी लोगों की गहरी आस्था है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस घाट पर सिर्फ फर्रुखाबाद ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, मैनपुरी, इटावा, भिंड, दिबियापुर, बिधूना, छिबरामऊ, बिसनगढ़ सहित कई जिलों और राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु कांवड़ भरने आते हैं। सावन के सोमवार को यहां मेला जैसा माहौल रहता है।

छोटे बच्चों में शिवभक्ति का यह जुनून इस बात का प्रमाण है कि सनातन संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं और नई पीढ़ी भी अपनी परंपराओं से पूरी तरह जुड़ी हुई है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article