फर्रुखाबाद। धारदार पुलिसिंग के लिए पुलिस विभाग मे नई कार्यप्रणाली की चर्चाएं शासन तक सुनी जा रहीं । पुलिस महकमे के भीतर तैनातियों और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर कई तरह के नये प्रयोग हुए हैं। वहीं अनुभव और वरिष्ठता को दरकिनार कर कुछ नए दरोगाओं को थानों की कमान सौंप दी गई है, जबकि वर्षों तक थाना और कोतवाली चला चुके वरिष्ठ इंस्पेक्टर उनके अधीन कार्य करने को मजबूर हैं।
जानकारों के अनुसार मोहम्मदाबाद कोतवाली में एक साथ पांच इंस्पेक्टर तैनात हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि इनमें से एक इंस्पेक्टर को ताजपुर चौकी का कार्य देख रहे है, जबकि दूसरी ओर ऐसे नए दरोगाओं को थानेदार बना दिया गया है जिन्होंने अपने सेवा काल में कभी किसी चौकी की स्वतंत्र कमान तक नहीं संभाली। इस व्यवस्था को लेकर पुलिस विभाग के भीतर ही असंतोष की चर्चा है। जनपद में एक वर्ग का प्रभाव लगातार बढ़ा है। इसी वर्ग के कई पुलिस कर्मियों को महत्वपूर्ण थानों की जिम्मेदारी सौंपी गई है और उसी वर्ग के पुलिसकर्मियों की भी अच्छी और प्रभावशाली थानों में तैनाती कराई गई है। पुलिस महकमे में इसे लेकर तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं।सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि जनपद के कुछ पूर्व थाना अध्यक्ष, जो वरिष्ठता और अनुभव में काफी आगे हैं, आज उन नए थानेदारों के अधीन कार्य कर रहे हैं जो हाल ही में थानेदार की नई जिम्मेदारी पाकर थानों की कमान संभाल रहे हैं। इससे वरिष्ठ अधिकारियों की भावनाएं आहत होने की बात भी सामने आ रही है।
पुलिस विभाग में सामान्यतः अनुभव को सबसे बड़ी पूंजी माना जाता है। कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, विवेचना और संवेदनशील मामलों के निस्तारण में अनुभवी अधिकारियों की भूमिका अहम होती है। ऐसे में वर्षों से इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के रहते हुए नए और अपेक्षाकृत कम अनुभवी दरोगाओं को महत्वपूर्ण थानों की कमान सौंपे जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।
जनपद में यह भी चर्चा है कि जिन थानों और कोतवाली में लंबे समय से परंपरागत रूप से इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की तैनाती होती रही है, वहां भी अब नए दरोगाओं को प्रभारी बनाया जा रहा है। इससे पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और तैनाती नीति को लेकर बहस छिड़ गई है।
जिले मे अनुभवी इंस्पेक्टर किनारे, नए दरोगाओं के हाथों में थानों की कमान, प्रभारी मंत्री नें लिया संज्ञान


