नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में लगातार जारी गतिरोध के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच संसद है और यदि जनहित के सभी प्रमुख मुद्दों पर सरकार कार्रवाई कर चुकी है, तो सदन की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्षी सांसदों से अपील की कि वे हंगामे के बजाय चर्चा के रास्ते को अपनाएं और संसद की गरिमा बनाए रखें।
पेपर लीक विवाद और छात्रों के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने कई बड़े फैसले लिए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके साथ ही पेपर लीक के मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन और सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल व पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून लाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। सरकार ने लोकसभा में इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए आठ घंटे का समय भी निर्धारित किया है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संसद का उद्देश्य जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस करना है, लेकिन लगातार नारेबाजी और व्यवधान से महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि सांसदों का दायित्व है कि वे लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करें और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप सदन को चलने दें।
संसद में जारी गतिरोध के बीच सरकार का कहना है कि वह परीक्षा सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि विपक्ष जवाबदेही और व्यापक बहस की मांग पर अड़ा हुआ है। इसी टकराव के कारण मानसून सत्र के कई दिन व्यवधान की भेंट चढ़ चुके हैं।


