नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों को गति देने के साथ-साथ कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा और भारतीय भाषाओं में अध्ययन को बढ़ावा देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल कीं। उनके कार्यकाल में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति को देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की आधारशिला माना गया।
धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा को रोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। प्रधानमंत्री श्री स्कूल , डिजिटल शिक्षा प्लेटफॉर्म, शिक्षक प्रशिक्षण, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों के विस्तार से देशभर के लाखों विद्यार्थियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। सरकार का दावा है कि इन पहलों से शिक्षा व्यवस्था अधिक आधुनिक, समावेशी और रोजगारोन्मुख बनी है।
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में ओबीसी वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। केंद्र सरकार द्वारा मेडिकल की अखिल भारतीय कोटा सीटों में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन को आगे बढ़ाया गया, जिससे हजारों विद्यार्थियों को मेडिकल शिक्षा में प्रवेश का अवसर मिला।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित वर्गों की शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए। इनमें ओबीसी विद्यार्थियों को भी लाभ मिला। इसके अलावा छात्रवृत्ति योजनाओं, डिजिटल शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा के विस्तार से पिछड़े वर्ग के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित हुए।
धर्मेंद्र प्रधान ने मातृभाषा और भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में कई फैसले लिए। इंजीनियरिंग सहित विभिन्न तकनीकी पाठ्यक्रमों को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की पहल की गई। वहीं दीक्षा , स्वयं और अन्य डिजिटल शिक्षा प्लेटफॉर्म के विस्तार से दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का प्रयास किया गया।
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का दायित्व संभालते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने स्किल इंडिया मिशन, आईटीआई नेटवर्क के विस्तार और रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को गति दी। इससे ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के युवाओं को कौशल आधारित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
शिक्षा क्षेत्र में सुधार, डिजिटल तकनीक के उपयोग, कौशल आधारित शिक्षा और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के कारण धर्मेंद्र प्रधान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे। समर्थकों का मानना है कि उनके कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिली, जबकि कुछ नीतियों और परीक्षाओं को लेकर विपक्ष ने आलोचना भी की। इस प्रकार उनका कार्यकाल उपलब्धियों और राजनीतिक बहस—दोनों कारणों से महत्वपूर्ण माना जाता है।


