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Thursday, June 25, 2026

जगह-जगह सजे ताजियों के दीदार को उमड़े अकीदतमंद, आज निकलेगा मोहर्रम का मातमी जुलूस

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फर्रुखाबाद। मोहर्रम यौमे आशूरा की पूर्व संध्या पर जनपद के विभिन्न मोहल्लों और इमामबाड़ों में धार्मिक आस्था का अनूठा नजारा देखने को मिला। जगह-जगह सजे ताजियों, अलमों और धार्मिक प्रतीकों के दीदार के लिए देर रात तक अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ती रही। भीषण गर्मी के बावजूद लोगों के उत्साह और श्रद्धा में कोई कमी नहीं दिखाई दी।
पूर्व रात्रि में विभिन्न इमामबाड़ों में कुरानखानी का आयोजन किया गया। वहीं मस्जिदों और मजलिसों में कर्बला की घटना का विस्तृत बयान किया गया। उलेमाओं ने हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानी को याद करते हुए इंसानियत, सत्य और न्याय के लिए संघर्ष का संदेश दिया। मजलिसों के दौरान अकीदतमंदों ने मातम कर शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
शहर और आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने अपने-अपने ताजियों और अलमों को आकर्षक ढंग से सजाया। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे पहुंचते रहे। देर रात तक इमामबाड़ों के बाहर रौनक बनी रही और श्रद्धालु ताजियों के दर्शन कर दुआएं मांगते नजर आए।
मोहर्रम के अवसर पर शुक्रवार सुबह विभिन्न मोहल्लों से मातमी जुलूस निकाले जाएंगे। जुलूस निर्धारित मार्गों से होते हुए कर्बला पहुंचेंगे, जहां धार्मिक परंपरा के अनुसार ताजियों और अलमों को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस दौरान या हुसैन की सदाओं और मातमी धुनों के बीच गमगीन माहौल रहेगा।
मोहर्रम के मौके पर टाउन हॉल तिराहे स्थित मस्जिद जान अली के निकट परवेज टेंट की ओर से सबील का विशेष इंतजाम किया गया है। यहां मातमी जुलूस में शामिल होने वाले लोगों के लिए शरबत और ठंडे पेय का वितरण किया जाएगा। आयोजन से जुड़े मिर्जा हसीन बेग ने बताया कि सुबह से ही सबील शुरू कर दी जाएगी, जिससे जुलूस में शामिल अकीदतमंदों को राहत मिल सके।
मोहर्रम के जुलूस को लेकर जिला प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। जुलूस मार्गों तथा कर्बला स्थल पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती के साथ अधिकारियों को भी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन ने लोगों से शांति, सौहार्द और आपसी भाईचारे के साथ धार्मिक कार्यक्रम संपन्न कराने की अपील की है।
मोहर्रम की पूर्व संध्या पर श्रद्धा, आस्था और गम के माहौल के बीच पूरा शहर इमाम हुसैन की याद में डूबा नजर आया, जबकि अब सभी की निगाहें शुक्रवार को निकलने वाले पारंपरिक मातमी जुलूसों पर टिकी हैं।

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