नई दिल्ली: दिल्ली सरकार (Delhi government) ने राजधानी के सरकारी स्कूलों (Government schools) के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 34 सरकारी स्कूलों की पुरानी इमारतों को ध्वस्त कर उनकी जगह 27 नए स्कूल भवन बनाने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय स्कूल भवनों की सुरक्षा और आधारभूत संरचना से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए लिया गया है। सरकार के अनुसार, कई स्कूल भवन पुराने हो चुके हैं और उन्हें आधुनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए नई इमारतों का निर्माण किया जाएगा, जिससे छात्रों और शिक्षकों को बेहतर एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध हो सके।
अधिकारियों के अनुसार, जिन 34 स्कूल भवनों को पुनर्निर्माण के लिए चिन्हित किया गया है, उनमें से 16 स्कूलों पर कार्य शुरू हो चुका है, जबकि 9 स्कूलों को ध्वस्तीकरण और पुनर्निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है। शेष परियोजनाओं के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। चयनित स्कूल भवनों में कई तरह की संरचनात्मक और भौगोलिक समस्याएं पाई गई हैं।
कुछ स्कूल परिसरों में बारिश के दौरान जलभराव की गंभीर समस्या सामने आती है, जिससे छात्रों और शिक्षकों को परेशानी होती है। इसके अलावा कुछ भवनों की संरचना समय के साथ कमजोर हो चुकी है, जिसके कारण सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। वहीं कुछ स्कूल ऐसी जगहों पर स्थित हैं जिन्हें छात्रों की सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से उपयुक्त नहीं माना जा रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सरकार ने राजधानी के सभी 1,090 सरकारी स्कूलों की डिजिटल प्रोफाइलिंग कराई है। इस प्रक्रिया के तहत स्कूल भवनों की स्थिति, सुरक्षा मानकों, उपलब्ध सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी जरूरतों का विस्तृत आकलन किया गया। अधिकारी ने बताया कि सभी 1,090 स्कूलों की प्रोफाइलिंग का कार्य पूरा हो चुका है और अब शिक्षा विभाग इस डेटा का विश्लेषण कर रहा है। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन स्कूलों में किस प्रकार के बुनियादी ढांचे संबंधी सुधारों की आवश्यकता है।
शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, पुनर्निर्माण के लिए चिन्हित स्कूलों में समस्याओं का स्वरूप अलग-अलग है। कुछ स्कूलों में बिजली आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतें, कुछ में जर्जर और कमजोर भवन संरचना, जबकि कई स्कूलों में पानी और जलभराव से संबंधित समस्याएं पाई गई हैं। अधिकारी ने बताया कि कई भवन सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, जबकि कुछ परिसरों में आधारभूत सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं थी। इन्हीं कारणों से संबंधित स्कूलों के पुनर्निर्माण का निर्णय लिया गया है।
डिजिटल प्रोफाइलिंग प्रक्रिया के तहत स्कूलों का क्लासरूम और भवन स्तर पर विस्तृत दस्तावेजीकरण किया गया। इसमें स्कूलों की विभिन्न सुविधाओं और संसाधनों का गहन मूल्यांकन शामिल था। इस सर्वेक्षण में स्वच्छता और सफाई व्यवस्था, पीने के पानी की उपलब्धता, सुरक्षा संबंधी इंतजाम, फर्नीचर की स्थिति, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मिड-डे मील किचन की सुविधाएं, विज्ञान और कंप्यूटर लैब की स्थिति, भवनों की संरचनात्मक मजबूती और रखरखाव निम्न बिंदुओं का आकलन किया गया
अधिकारियों के अनुसार, राजधानी के सभी 1,090 सरकारी स्कूलों की डिजिटल प्रोफाइलिंग पूरी हो चुकी है। शिक्षा विभाग अब इस डेटा का विश्लेषण कर रहा है ताकि यह तय किया जा सके कि किन स्कूलों में किस प्रकार के सुधार कार्यों की जरूरत है और किन परिसरों को प्राथमिकता के आधार पर उन्नत किया जाना चाहिए। शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, स्कूल भवनों के प्रत्येक कमरे को 360-डिग्री इमेजिंग तकनीक की मदद से डिजिटाइज किया गया है।
इससे स्कूल परिसरों का स्थायी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हुआ है, जिसे भविष्य में वर्चुअल वॉकथ्रू, योजना निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जा सकेगा। अधिकारी ने बताया कि इस डिजिटल डेटाबेस के जरिए स्कूलों की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन संभव हुआ है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी कमियों की पहचान और प्राथमिकता तय करने में मदद मिल रही है।


