मेरठ: चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड (Saurabh Rajput Murder Case) में अदालत (court) ने बुधवार को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। घटना के करीब 591 दिन बाद आए फैसले में दोनों को हत्या के बाद शव छिपाने के मामले में सात साल की कैद और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी दी गई। जिला जज अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने दोनों को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया।
फैसला सुनाए जाने के दौरान सौरभ की मां भावुक हो गईं। उन्होंने अदालत से कहा कि आज सौरभ की आत्मा को शांति मिली होगी। जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यवाही में शामिल मुस्कान और साहिल को सजा सुनाने से पहले न्यायाधीश ने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि जघन्य अपराध करने वालों को दंडित करना भी न्यायालय का धर्म है।
बुधवार शाम करीब 4:15 बजे फैसला सुनाते हुए जिला जज ने धर्म के पालन और समाज में स्वस्थ वातावरण बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गंभीर अपराध करने वाले व्यक्ति को उसके अपराध के अनुरूप दंड देना न्यायालय का दायित्व है। फैसले के बाद अदालत कक्ष में तालियां गूंज उठीं। ब्रह्मपुरी के इंद्रानगर निवासी सौरभ राजपूत ने वर्ष 2016 में गौरीपुरा निवासी मुस्कान रस्तोगी से प्रेम विवाह किया था। वर्ष 2019 में पारिवारिक विवाद के बाद दोनों अलग हो गए। इसी वर्ष मुस्कान ने बेटी पीहू को जन्म दिया, जो फिलहाल अपने नाना-नानी के पास रहती है।
इसी दौरान मुस्कान की मुलाकात स्कूल के पुराने सहपाठी और इंद्रानगर निवासी साहिल शुक्ला से शापरिक्स मॉल में हुई। सौरभ के विदेश से लौटने के बाद 24 फरवरी 2025 को मुस्कान और साहिल ने उसकी हत्या की योजना बनाई। आरोपों के अनुसार, तीन मार्च 2025 की रात दोनों ने सौरभ को सब्जी में नशीला तरल पदार्थ मिलाकर दिया। इसके बाद चाकू से उसके दिल और गर्दन पर वार कर उसकी हत्या कर दी गई। फिर शव के चार टुकड़े किए गए और उसे नीले ड्रम में सीमेंट डालकर छिपा दिया गया।
इसके बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश घूमने चले गए। दोनों के 17 मार्च को लौटने के बाद 18 मार्च को मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने 19 मार्च को दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अदालत ने बीएनएस की धारा 103 और धारा 3(5) के तहत हत्या के अपराध में दोनों को मृत्युदंड सुनाया। वहीं, धारा 238ए के तहत हत्या के बाद शव छिपाने के मामले में सात साल की कैद और दोनों पर अलग-अलग 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
शासकीय अधिवक्ता केके चौबे ने बताया कि सौरभ की हत्या के बाद शव के चार टुकड़े किए गए थे। उनके मुताबिक, तीन टुकड़े साहिल के घर ले जाए गए और चार मार्च को नीले ड्रम में सीमेंट डालकर छिपा दिए गए। मामले में सौरभ के दोस्त और उसकी मां रेणू की गवाही अहम रही। मुस्कान की सौतेली मां कविता और पिता प्रमोद रस्तोगी ने भी अदालत में लिखित रूप से कहा था कि मुस्कान ने जघन्य अपराध किया है और अदालत का फैसला उन्हें स्वीकार होगा।
मुस्कान और साहिल की अधिवक्ता रेखा जैन ने अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की थी। उन्होंने मुस्कान की दोनों बेटियों का हवाला देते हुए राहत देने का अनुरोध किया, लेकिन अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। सभी तथ्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने दोनों को सजा सुनाई।


