फर्रुखाबाद। याकूतगंज स्थित ज्ञानफोर्ट इनोवेटिव स्कूल की कक्षा 9 की छात्रा बेटी दक्षिणा सिंह ने अपनी वैज्ञानिक सोच और नवाचार के दम पर फर्रुखाबाद का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। भारत सरकार द्वारा प्रायोजित इंस्पायर मानक प्रतियोगिता में दक्षिणा का चयन देश के 60 विजेताओं में हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार और विद्यालय में खुशी का माहौल है।
राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस प्रतियोगिता में देशभर से लगभग 11,29,000 विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 790 विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ। इसके बाद नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 12 से 14 अक्टूबर तक आयोजित प्रतियोगिता में दक्षिणा ने अपने नवाचार का प्रदर्शन किया और देशभर से चुने गए 60 विजेताओं में स्थान हासिल किया।
दक्षिणा ने लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट अर्धबेलनाकार फुटरेस्ट तैयार किया है। उनका यह नवाचार आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक सक्रियता बनाए रखने की जरूरत को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इस उपकरण में पैरों को सहारा देने के साथ हल्की और नियंत्रित गतिविधि को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था की गई है।
दक्षिणा के इस मॉडल में रॉकिंग मूवमेंट, एक्यूप्रेशर शैली के उभार, मोड़कर रखने की सुविधा तथा गतिविधियों की गणना के लिए स्मार्ट सेंसर और प्रदर्शन-पटल जैसी विशेषताएं शामिल हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों और लंबे समय तक बैठे रहने वाले अन्य लोगों को नियमित रूप से पैरों की नियंत्रित गतिविधि के लिए प्रोत्साहित करना है।
इस नवाचार से भविष्य में लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए उपयोगी सहायक उपकरण विकसित करने की संभावनाएं सामने आई हैं। इस परियोजना को बेहतर दिशा देने के लिए भारत सरकार और राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान की ओर से विभिन्न चरणों में आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है।
केंद्रीय राज्यमंत्री ने किया सम्मानित
राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के समापन के बाद केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दक्षिणा सिंह को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त, जापान सरकार की सकूरा साइंस योजना के अंतर्गत दक्षिणा को भारत सरकार की ओर से जापान जाने का अवसर प्रदान किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
दक्षिणा सिंह आवास विकास, फर्रुखाबाद की निवासी हैं। उनके पिता आलोक सिंह रियल एस्टेट व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि माता डॉ. प्रीती सिंह फिजियोथेरेपिस्ट हैं। दक्षिणा की इस उपलब्धि में उनके माता-पिता और विद्यालय का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है।
दक्षिणा की सफलता ने यह साबित किया है कि कम उम्र में भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मक सोच और निरंतर प्रयासों के माध्यम से ऐसे नवाचार किए जा सकते हैं, जो समाज की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हों। उनकी उपलब्धि फर्रुखाबाद के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती है।


