मिर्जापुर। जिले में दो लग्जरी फॉर्च्यूनर गाड़ियों से भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। चील्ह थाना क्षेत्र में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान करोड़ों रुपये नकद मिलने की सूचना सामने आई, लेकिन बरामद रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आने से पूरे मामले पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार पुलिस ने पूर्व सूचना के आधार पर चील्ह चौराहे पर सघन चेकिंग अभियान चलाया और दो संदिग्ध फॉर्च्यूनर गाड़ियों को रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान गाड़ियों से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई। नोटों की संख्या अधिक होने के कारण गिनती के लिए बैंक से मशीनें मंगाई गईं और कई घंटों तक सुरक्षा घेरे में कैश की गणना की गई।
मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब शुरुआती स्तर पर करीब चार करोड़ रुपये बरामद होने की चर्चा सामने आई, जबकि बाद में आधिकारिक स्तर पर लगभग 1.90 करोड़ रुपये की बरामदगी की बात कही गई। दोनों आंकड़ों के बीच बड़े अंतर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आखिर शुरुआती दावे और आधिकारिक आंकड़ों में इतना बड़ा फर्क क्यों है, इसे लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि पकड़ी गई गाड़ियों का संबंध खनन, ट्रांसपोर्ट, क्रशर प्लांट और पेट्रोल पंप कारोबार से जुड़े लोगों से बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इतनी बड़ी नकदी कहां से लाई जा रही थी और इसका अंतिम गंतव्य क्या था। साथ ही उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से जुड़े कारोबारी नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
करोड़ों रुपये की नकदी मिलने के बाद आयकर विभाग को भी सूचना दी गई और विभागीय टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी बरामदगी के बाद आगे की कार्रवाई कितनी तेजी से की जाएगी और नकदी के स्रोत का खुलासा कब तक हो सकेगा।
फिलहाल पुलिस ने दोनों गाड़ियों और बरामद नकदी को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभिन्न एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला केवल नकदी बरामदगी तक सीमित नहीं बल्कि संभावित वित्तीय अनियमितताओं, कर चोरी और अवैध कारोबारी नेटवर्क से जुड़े बड़े खुलासों का कारण बन सकता है।


