फर्रुखाबाद। दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश की ओर से कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर शासन को एक माह का समय दिया गया है। मांगों पर निर्धारित अवधि में सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर प्रदेश संघ ने शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से सत्याग्रह शुरू करने का निर्णय लिया है।
प्रदेश संघ की ओर से आठ अगस्त को लखनऊ में आयोजित आमसभा में न्यायालय कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इनमें जिला न्यायालय सेवा नियमावली में आवश्यक संशोधन, फास्ट ट्रैक न्यायालयों के संविदा कर्मचारियों के वेतन में 10 प्रतिशत वृद्धि के साथ नियमितीकरण, जनपद न्यायालयों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का पद पुनर्स्थापित करने की मांग प्रमुख है।
इसके अलावा 4600 ग्रेड वेतन वाले लिपिकीय कर्मचारियों को राजपत्रित प्रतिष्ठा प्रदान करने तथा सातवें वेतन आयोग के अनुरूप मकान किराया भत्ते का पुनरीक्षण किए जाने की मांग भी रखी गई है।
इकाई के कार्यवाहक अध्यक्ष ऋषि यादव ने प्रदेश संघ के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि न्यायालय कर्मचारी लंबे समय से अपनी जायज मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शासन को पर्याप्त अवसर दिया जा चुका है और अब कर्मचारियों को सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि प्राथमिकता वार्ता और शांतिपूर्ण समाधान की है, लेकिन यदि एक माह के भीतर मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश संघ के निर्देश पर फर्रुखाबाद इकाई भी सत्याग्रह में पूरी मजबूती के साथ शामिल होगी।


