फर्रुखाबाद: लंबे समय से पनप रहे भ्रष्टाचार, माफिया संरक्षण और प्रशासनिक मनमानी पर आखिरकार शासन ने बड़ा एक्शन लेते हुए जिलाधिकारी को पद से हटा दिया। जिले में खुलेआम भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा था, जातिवाद को संरक्षण मिल रहा था और माफिया तंत्र को बेलगाम छूट दी गई थी। इतना ही नहीं, दागी और विवादित लोगों के घरों और कार्यक्रमों में अधिकारियों की मौजूदगी ने प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
सबसे चौंकाने वाला मामला नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय से जुड़ा सामने आया, जहां जून 2025 में सेवानिवृत्त हो चुके विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता दीपेंद्र पाल डीके से खुलेआम सरकारी काम कराए जा रहे थे। नियमों को ताक पर रखकर इस तरह की व्यवस्था चलने की शिकायत जब शासन तक पहुंची तो बीते रविवार उन्हें सरकारी आवास खाली करना पड़ा। इससे साफ संकेत मिला कि सिस्टम के भीतर मिलीभगत कितनी गहरी थी।
सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्यों में जमकर उगाही हो रही थी और नगर पालिकाओं में बिना प्रक्रिया के फाइलों को तत्काल वित्तीय मंजूरी दी जा रही थी। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका और भी गहरा गई। वहीं जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी के कार्यकाल के कई फैसले अब जांच के दायरे में आ गए हैं, जिनमें पक्षपात और नियमों की अनदेखी के आरोप शामिल हैं।
माफिया अनुपम दुबे और उसके परिवार को संरक्षण देने का मुद्दा भी इस कार्रवाई का बड़ा कारण बना। आरोप है कि उनकी पत्नी को खुलेआम सरकारी मंचों पर जगह दी जा रही थी, जिसकी शिकायत शासन तक पहुंची। इसके अलावा गैंगस्टर मामलों में धीमी कार्रवाई और कानून व्यवस्था के प्रति ढीला रवैया भी शासन के निशाने पर रहा।
पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि फर्रुखाबाद में प्रशासनिक तंत्र पर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे और अब शासन ने सख्त संदेश देते हुए कार्रवाई की है। आने वाले दिनों में जांच की आंच और तेज होने की संभावना है, जिससे कई और बड़े नामों के सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।


