बेंगलुरु। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने के विरोध के बीच बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ने 12 सितंबर का दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया। विश्वविद्यालय ने 27 अगस्त को इसकी जानकारी दी, हालांकि सूचना में छात्रों के विरोध का उल्लेख नहीं किया गया। पिछले एक महीने में यह चौथा संस्थान है, जहां मुख्य न्यायाधीश को मुख्य अतिथि बनाए जाने के बाद कार्यक्रम रद्द, स्थगित या मुख्य अतिथि बदला गया है।
विश्वविद्यालय के 700 से अधिक मौजूदा और पूर्व छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और भारतीय विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को समारोह में बुलाए जाने पर आपत्ति जताई थी। इनमें 574 मौजूदा और 128 पूर्व छात्र शामिल हैं। छात्रों ने हैदराबाद के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद को लेकर भी भारतीय विधिज्ञ परिषद से माफी की मांग की थी।
विवाद की शुरुआत हैदराबाद से हुई थी। करीब 450 छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध करते हुए प्रशासन को पत्र लिखा था। बाद में भारतीय विधिज्ञ परिषद ने 2026 के स्नातकों के वकील के रूप में पंजीकरण पर रोक लगाने का निर्देश दिया, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि उन्होंने निमंत्रण स्वीकार नहीं किया था।
मुंबई के टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान का 2 अगस्त का दीक्षांत समारोह भी स्थगित हुआ था। बाद में 22 अगस्त को समारोह हुआ और मुख्य अतिथि बदल दिया गया। वहीं, सोनीपत के ओपी जिंदल वैश्विक विश्वविद्यालय के 25 जुलाई के समारोह में मुख्य न्यायाधीश शामिल नहीं हुए और उनकी जगह न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा ने अध्यक्षता की।
मुख्य न्यायाधीश की बेरोजगार युवा वकीलों पर की गई ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी के बाद भी विवाद हुआ था। इसके बाद सामाजिक माध्यमों पर अभियान चला और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ। हालांकि 14 अगस्त को हैदराबाद विवाद की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश ने छात्रों के विरोध के अधिकार का समर्थन किया और भारतीय विधिज्ञ परिषद की कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी।
बेंगलुरु में दीक्षांत समारोह रद्द होने से विधि संस्थानों में मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियों और उनके कार्यक्रमों को लेकर चल रहा विवाद फिर चर्चा में आ गया है। विश्वविद्यालय ने समारोह रद्द करने की वजह स्पष्ट नहीं की है।


