2022 में सात चरणों में हुआ था मतदान, इस बार अवधि घटाने की तैयारी
सितंबर के अंतिम सप्ताह से राज्यों में पहुंचेंगी आयोग की टीमें
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ने के साथ ही चुनाव आयोग ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोग के स्तर से मिले संकेतों के अनुसार, इस बार उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव तीन से चार चरणों में कराया जा सकता है। वर्ष 2022, 2017 और 2012 में सात चरणों में चुनाव कराने के बाद इस बार मतदान की अवधि कम करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अंतिम चरण और कार्यक्रम पर फैसला राज्यों के साथ विचार-विमर्श के बाद होगा।
बड़े राज्य में कम चरणों का प्रयोग
उत्तर प्रदेश के साथ अगले वर्ष पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। आयोग की प्रारंभिक तैयारियों के मुताबिक पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में एक-एक चरण में मतदान कराया जा सकता है। मणिपुर में वर्ष 2017 और 2022 की तरह दो चरणों में चुनाव होने की संभावना है। आयोग का जोर चुनाव प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने के बजाय कम समय में शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से पूरा करने पर है।
बिहार और बंगाल से बढ़ा आयोग का भरोसा
कम चरणों में चुनाव कराने की रणनीति को लेकर आयोग ने हाल के चुनावों में अपनी क्षमता परखी है। बिहार में वर्ष 2015 में पांच और 2020 में तीन चरणों में मतदान हुआ था, जबकि 2025 में विधानसभा चुनाव केवल दो चरणों में कराया गया। इसी तरह पश्चिम बंगाल में 2016 में छह और 2021 में आठ चरणों में चुनाव हुए थे, लेकिन 2026 में मतदान दो चरणों में कराया गया। इसी अनुभव के आधार पर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भी सात चरणों के बजाय तीन से चार चरणों का विकल्प सामने आया है।
चुनाव अवधि छोटी रखने पर जोर
सूत्रों के अनुसार चुनाव के दौरान भ्रामक प्रचार और राजनीतिक आख्यानों को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच आयोग भी चुनाव की अवधि सीमित रखने के पक्ष में है। लंबे समय तक चलने वाले चुनाव में सुरक्षा बलों और प्रशासनिक मशीनरी की तैनाती लगातार बनी रहती है। ऐसे में कम चरणों में चुनाव कराने से संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और पूरी प्रक्रिया को अपेक्षाकृत कम समय में पूरा करना संभव हो सकता है।
सितंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होगा राज्यों का दौरा
चुनावी तैयारियों के अगले चरण में आयोग की टीमें सितंबर के अंतिम सप्ताह से चुनावी राज्यों का दौरा शुरू कर सकती हैं। इसके लिए टीमों के गठन की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है। आयोग की टीमें चुनावी तैयारियों, प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा, मतदान केंद्रों और मतदाता सूची समेत विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेंगी। जिन राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां पहले दौरा किए जाने की संभावना है।
यूपी, गोवा और मणिपुर में एसआईआर पूरा
उत्तर प्रदेश, गोवा और मणिपुर में विशेष गहन पुनरीक्षण का काम पूरा हो चुका है। वहीं पंजाब और उत्तराखंड में एसआईआर के तहत अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन अक्टूबर में होने की संभावना है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद आयोग चुनावी तैयारियों को और गति देगा। इसके साथ ही मतदान केंद्रों, कार्मिकों, सुरक्षा बलों और अन्य व्यवस्थाओं की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा।
मार्च में चार राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल पूरा
पांचों राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल अलग-अलग समय पर पूरा होगा। मणिपुर में 13 मार्च 2027, गोवा में 14 मार्च, पंजाब में 16 मार्च और उत्तराखंड में 28 मार्च 2027 तक विधानसभा का कार्यकाल है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक है। संवैधानिक समयसीमा को देखते हुए इन राज्यों में फरवरी-मार्च 2027 के दौरान चुनाव कराए जाने की संभावना है।
यूपी पर सबसे अधिक नजर
पांचों राज्यों में उत्तर प्रदेश का चुनाव सबसे बड़ा और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटें हैं और चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसे में चुनाव आयोग के संभावित तीन से चार चरणों के संकेत ने राजनीतिक दलों की गतिविधियों को और गति दे दी है। हालांकि चुनाव की वास्तविक तारीख, चरणों की संख्या और मतदान कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा आयोग द्वारा बाद में की जाएगी।


