फर्रुखाबाद। कृषि उत्पादन मंडी समिति द्वारा मंडी लाइसेंस नवीनीकरण के लिए लागू की गई नई प्रक्रिया व्यापारियों और आढ़तियों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। हर वर्ष नए नियमों के साथ बढ़ती दस्तावेजी औपचारिकताओं ने फर्म मालिकों की चिंता बढ़ा दी है। इस बार लाइसेंस नवीनीकरण के लिए घर की जीपीएस फोटो, ई-आधार कार्ड, मोबाइल नंबर का आधार से लिंक होना समेत कई अतिरिक्त दस्तावेज अनिवार्य कर दिए गए हैं, जिससे छोटे और बुजुर्ग व्यापारियों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सातनपुर मंडी के अंतर्गत आने वाले लाइसेंस धारकों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मंडी समिति की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार फर्म प्रोपराइटर और गारंटर दोनों को शपथ पत्र, ई-आधार, पैन कार्ड, गत वर्ष के लाइसेंस की प्रति, निवास की जीपीएस लोकेशन युक्त फोटो, आधार से लिंक मोबाइल नंबर का प्रमाण तथा दुकान की किराया रसीद समेत एक दर्जन के करीब दस्तावेज जमा करने होंगे। इसके अलावा फर्म पर किसी प्रकार की पुरानी देनदारी या अवशेष स्टॉक न होने की शर्त भी रखी गई है।
व्यापारियों का कहना है कि पहले से ऑनलाइन व्यवस्था होने के बावजूद लगातार नए दस्तावेज मांगे जाना समझ से परे है। उनका तर्क है कि मंडी समिति के पास लाइसेंस, कर भुगतान और देनदारियों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहता है, ऐसे में ईमानदारी से कर जमा करने वाले व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं है। कई बुजुर्ग आढ़तियों का कहना है कि उन्हें मोबाइल और ऑनलाइन प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं है, जिससे नए नियम उनके लिए और अधिक कठिनाई पैदा कर रहे हैं।
व्यापारियों ने मांग की है कि जीपीएस फोटो और ई-आधार से जुड़ी जटिल प्रक्रिया को सरल बनाया जाए तथा समय से कर जमा करने वाले लाइसेंस धारकों को अनावश्यक दस्तावेजी औपचारिकताओं से राहत दी जाए। वहीं मंडी सचिव अनूप कुमार दीक्षित का कहना है कि लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शिता और मंडी हित को ध्यान में रखकर लागू की गई है तथा किसी भी ईमानदार व्यापारी को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं होने दिया जाएगा।


