फाइलों मेंं सिमट गया सीएम का जीरो टॉलरेंस, अब कागजों में अभियान!
सरकारी व्हाटसएप गु्रपों पर जुड़े कई अपराधी जो पुलिस और प्रशासन से ही पा लेते जानकारियां, दलाल मीडिया भी बुरी तरह हावी =
बदले अफसर, नहीं बदल पा रही व्यवस्था
=सिमट चुका माफिया पर अभियान
=बंद हुई गिरफ्तारियां, भू माफियाओं पर सितम
यूथ इंडिया। फर्रूखाबाद
योगी सरकार बनने के बाद एक जमाना था जब तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने जनपद में अपराध, भूमाफिया और संगठित नेटवर्क के खिलाफ खुला विगुल फूंका था तो प्रशासनिक सख्ती का माहौल देखा गया था। जिसे बदस्तूर तैनात हुए एसपी विकास बाबू ने न केवल जीवित रखा बल्कि धरातल पर भी उतारा। उसके बाद एसपी आलोक प्रियदर्शी के दौर ने तो टारगेट की हवा ही निकाल दी। अब धीरे-धीरे जैसे समय बीता हालात भी पुराने ढेर्रे पर लौटने लगे। जीरो टॉलरेंस का दावा अब फाइलों में सिमट कर रह गया है।
शिक्षा विभाग से लेकर कई विभागों में प्रशासनिक स्तर पर लंबित जांचों के बाद माफिया तंत्र मनमानी पर अब उतारू है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा आम है कि मामलों में शिकायतों के बाबजूद अपेक्षित कार्यवाही होनी नही।
शिक्षा विभाग और अन्य महत्वपूर्ण कार्यालयों को लेकर भी सवाल आम हो गये है। महत्वपूर्ण पटल ऐसे कर्मचारियों के पास हैं जिनकी कार्यप्रणाली हमेशा संदेह के घेरों में रही।
जिले में योगी सरकार की भू माफिया विरोधी कार्यवाही कभी प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय रही थी, वह अभियान भी पुरानी धार खो चुका है। कई पुराने विवादित मामलों में पीडित जवाव खोजते थकते नजर आ रहे। पीडब्लूडी विभाग समेत तमाम भूमि विवाद आज तक निर्णायक नतीजे पर नहीं पहुंचे, ऐसे में पारदर्शिता और जबावदेही को लेकर भी बहस चलती रहती। गैंगस्टर योगेन्द्र सिंह यादव चन्नू जैसे तमाम अपराधी पुलिस की पकड़ के बाहर हैं तमाम मुकदमें आरोप पत्रों के महीनों से इंतजार कर रहे प्रशासन आईजीआरएस पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में व्यस्त है। समस्या आज भी पुरानी जिंदा हैं। सरकारी गु्रपों पर कई अपराधी दलाल मीडिया की आढ़ में जुड़े जिन्हें पुलिस ही खुलेआम सूचनाऐं देती, अप्रशिक्षित और कनिष्ट बाबू पुरानी सेटिंग के बल पर महत्वपूर्ण पटल संभाल रहे। अधिकारी चंद लोगों से जानकारी पाकर व्यवस्था संभाल रहे। न कोई नेटवर्क है न कोई सोंच है बस कागजी पेट भरते रहे और व्यवस्था सुचारू दिखे। बाबुओं के बलबूते फलफूल रहे दागी और भ्रष्टाचारी
फर्रूखाबाद। जिला वेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से लेकर बीएसए कार्यालय हो या मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय वर्षो से तैनात बाबू जिन्हें कागजों पर तो हटाया जाता लेकिन पटल वहीं देखते उनके बलबूते जिले में आज भी फलफूल रहे दागी और भ्रष्टाचारी। दिखावे में कुछ के तो स्थानांतरण हुए भी लेकिन बैठते वह अपनी पुरानी गद््दी पर ही। हैरतअंगेज बात तो यह है कि जिन दागी बाबुओं की सेवा निवृति हो चुकी उनके चेले आज भी गंभीर फाइलों में मंत्रणा उन्हीं से करते क्योंकि महत्वपूर्ण पटलों पर तैनात बाबुओं को अनुभव ही नही जबकि अनुभवी प्रभावहीन कुर्सियों पर पड़े।


