फर्रुखाबाद। कला एवं साहित्य की अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती द्वारा ग्रीष्मकालीन कार्यशाला में हस्तकला का प्रशिक्षण मदन मोहन कनोड़िया जूनियर विद्यालय में दिया जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों को परंपरागत हस्तकला से जोड़कर सांस्कृतिक चेतना का विकास करना है।
प्रशिक्षिका कल्पना मिश्रा ने बताया कि हस्तकला हमारे जीवन, संस्कृति और अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है। यह केवल वस्तुओं की निर्माण प्रक्रिया नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं, सांस्कृतिक चेतना और कारीगरों की रचनात्मकता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। बच्चों को मिट्टी, कागज और कपड़े से विविध कलाकृतियां बनाना सिखाया जा रहा है।
गुंजा जैन और अजीत दीक्षित ने कार्यशाला का भ्रमण किया। उन्होंने सभी विधाओं में चल रही गतिविधियों की प्रशंसा की और प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। दोनों अतिथियों ने कहा कि हस्तकला बच्चों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
इस अवसर पर संस्कार भारती के प्रांतीय महामंत्री सुरेंद्र पाण्डेय, अरविंद दीक्षित, गौरव मिश्रा “बंटी”, नवीन मिश्रा, अनुभव सारस्वत, अनुराग अग्रवाल, नरेंद्र नाथ मिश्र, रविंद्र भदोरिया, आशीष शर्मा, कुल भूषण श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे। आयोजकों ने बताया कि कार्यशाला से बच्चों में रचनात्मकता और भारतीय कला के प्रति रुचि बढ़ रही है।
हस्तकला कार्यशाला के माध्यम से संस्कृति से जुड़ रहे बच्चे


