देहरादून। उत्तराखंड की आस्था का सबसे बड़ा आयोजन चार धाम यात्रा इस बार अभूतपूर्व सुरक्षा घेरे में शुरू होने जा रहा है। किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने मिलकर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी प्लान तैयार किया है। करीब 7000 से अधिक पुलिस जवानों की तैनाती के साथ पूरे यात्रा मार्ग को हाई अलर्ट जोन में तब्दील कर दिया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरे यात्रा क्षेत्र को तीन मुख्य जोन में विभाजित किया गया है। इसके अलावा 16 सुपर जोन, 43 जोन और 149 सेक्टर बनाए गए हैं, जहां अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों और फोर्स की जिम्मेदारी तय की गई है। हर सेक्टर में रियल-टाइम मॉनिटरिंग और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए कंट्रोल सिस्टम तैयार किया गया है।
संवेदनशीलता को देखते हुए Anti-Terrorism स्क्वाड (ATS), बम डिस्पोजल Squad (BDS) और Indo-Tibetan बॉर्डर पुलिस (ITBP) को भी तैनात किया गया है। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में ITBP की भूमिका अहम रहेगी, जबकि एटीएस और बीडीएस संभावित आतंकी खतरे और विस्फोटक सामग्री की जांच पर नजर रखेंगे।
टेक्नोलॉजी के स्तर पर भी इस बार सुरक्षा को नए आयाम दिए गए हैं। 1200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और 15 ड्रोन पूरे यात्रा मार्ग, पार्किंग, पड़ाव और मंदिर परिसरों की निगरानी करेंगे। कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
प्रशासन के मुताबिक, हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं, ऐसे में भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक कंट्रोल और आपदा प्रबंधन भी सुरक्षा योजना का हिस्सा हैं। पिछले वर्षों में आई आपदाओं और भीड़ नियंत्रण की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इस बार रणनीति को और ज्यादा सख्त बनाया गया है।
साफ है कि इस बार चारधाम यात्रा सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि हाईटेक सुरक्षा और सख्त निगरानी का भी बड़ा उदाहरण बनने जा रही है। अब देखना होगा कि इतनी बड़ी तैयारियों के बीच श्रद्धालुओं की यात्रा कितनी सुरक्षित और व्यवस्थित रहती है।
बड़ी खबर: चारधाम यात्रा पर हाई अलर्ट, 7000 जवानों का सुरक्षा कवच—ड्रोन और सीसीटीवी से 24×7 निगरानी


