अयोध्या। राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा प्रकरण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच कुछ मीडिया रिपोर्टों और आरोपों में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की कार्यशैली तथा मंदिर परिसर में तैनात निजी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि मंदिर परिसर में लगभग 400 निजी सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए, जिन पर ट्रस्ट के खाते से हर महीने करीब एक करोड़ रुपये, यानी सालाना लगभग 12 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे थे।
आरोप लगाने वालों का दावा है कि जब मंदिर की सुरक्षा के लिए पहले से केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बल तैनात हैं, तब इतनी बड़ी निजी सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता क्यों पड़ी। विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि चढ़ावे की सुरक्षा, धन के प्रबंधन और निजी सुरक्षा एजेंसी की नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सूत्रों और मंदिर से जुड़े जानकारों का कहना है कि चंपत राय की अयोध्या में एक बिल्कुल अलग दुनिया थी, जिसमें वे किसी ‘राजा’ की तरह रहते थे। उन्होंने अपनी एक ‘निजी सेना’ खड़ी कर रखी थी, जिसे निजी सिक्योरिटी गार्ड्स का नाम दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इन निजी गार्ड्स को रखने के लिए ट्रस्ट के अकाउंट से हर महीने ₹1 करोड़ की भारी-भरकम राशि, यानी सालाना लगभग ₹12 करोड़ रुपये नंबर एक में आधिकारिक तौर पर दिए जा रहे थे। आरोप है कि यह भारी-भरकम सुरक्षा कोई सुरक्षा देने के लिए नहीं, बल्कि चढ़ावे और दान के ‘लूट के माल’ को सुरक्षित रूट देने के लिए तैनात की गई थी।
जांच एजेंसियां पूरे प्रकरण
के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।


