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Friday, June 12, 2026
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स्याही, दिशा और सार्थकता का दर्शन

भरत चतुर्वेदी स्याही जब तक बोतल में बंद रहती है, तब तक वह केवल एक द्रव है। न उसका कोई अर्थ होता है, न कोई...

मकर संक्रांति: पतंगबाज़ी, आनंद, संस्कृति और चेतना

डॉ. सत्यवान सौरभ मकर संक्रांति का पर्व भारतीय संस्कृति में केवल एक तिथि नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन, सामाजिक सहभागिता और लोकजीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है।...

मिलावटी पदार्थों से स्वास्थ्य पर संकट

डॉ विजय गर्ग देश में खाद्य पदार्थों में मिलावट की समस्या एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में बदल चुकी है। बाजार में नकली और मिलावटी...

समानुभूति की संवेदना

डॉ विजय गर्ग समकालीन समाज तेजी से बदल रहा है। हर दिन अखबारों और डिजिटल माध्यमों में पीड़ा, असमानता और संघर्ष की खबरें आम हो...

यूपी में लोकतंत्र और सुरक्षा पर सवाल

वोट कटौती से लेकर महिला सुरक्षा तक—सरकार के दावों की कसौटी उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर तीखे सवालों के घेरे में है। समाजवादी...

पाठशाला का सच और सत्ता का झूठ: गठबंधन बनाम योग्यता का टकराव

सूर्या अग्निहोत्री जब शिक्षा मेरिट सिखाए और राजनीति मैनेजमेंट, तो हार केवल सिद्धांतों की नहीं भविष्य की होती है। हमारी ज़िंदगी की पहली पाठशाला शिक्षा होती है।...

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