नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद सरकार ने अवैध और जर्जर इमारतों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नगर निगम को अवैध पीजी और हॉस्टलों की व्यापक जांच करने तथा नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
सत्य निकेतन में हादसे के बाद आसपास की इमारतों पर भी बुलडोजर चलना शुरू हो गया है। मंगलवार तक 24 संपत्तियों पर तोड़फोड़ और सात अवैध ढांचों को सील किया जा चुका था। कार्रवाई के चलते कई गर्ल्स पीजी में रहने वाली छात्राएं अपने कमरों को खाली कर दूसरी जगह शिफ्ट हो रही हैं।
हादले के मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें इमारत के मालिक हरिराम बंसल, उनकी पत्नी उर्मिला, बेटे महेश, लेबर ठेकेदार सनोज और पीजी संचालक सुधांशु शामिल हैं। पीजी संचालक का पार्टनर शुभम त्यागी फरार बताया गया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि हादसे से पहले बेसमेंट में मरम्मत और निर्माण का काम चल रहा था। बेसमेंट में मलबा भरने और एक दीवार हटाए जाने के बाद इमारत का ढांचा कमजोर हुआ। पुलिस को आशंका है कि निर्माण के दौरान मशीन से पैदा हुई कंपन और कमजोर संरचना के कारण इमारत भरभराकर गिर गई।
उधर, हादसे के बाद आसपास के एक गर्ल्स पीजी की दीवारों और छत में दरारों के वीडियो सामने आने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। नगर निगम ने दक्षिणी क्षेत्र के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है।
मामला अब सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि जर्जर और अवैध इमारतों का मुद्दा केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा और देशभर में भवन सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा की जा सकती है। मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।


