लखनऊ
प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने संगठन विस्तार और जनाधार मजबूत करने की दिशा में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी एक ओर जहां विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को अपने साथ जोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर कार्यकर्ता सम्मेलनों के माध्यम से संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी क्रम में पूर्व राज्य मंत्री अशोक गौतम की बसपा में वापसी हुई है। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें लखनऊ का मुख्य मंडल प्रभारी नियुक्त किया है। इसके अलावा बुलंदशहर के मुकेश पंडित सहित कई नेताओं ने भी बसपा की सदस्यता ग्रहण की है। नोएडा से पूर्व लोकसभा प्रत्याशी रहे सतवीर नागर की भी पार्टी में वापसी कर उन्हें मेरठ मंडल का जोनल प्रभारी बनाया गया है। राजनीतिक जानकार इसे आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत संगठन को नई मजबूती देने की रणनीति मान रहे हैं।
बसपा का फोकस केवल पुराने नेताओं की वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य दलों के प्रभावशाली नेताओं को भी अपने साथ जोड़ने पर है। रविवार को आजाद समाज पार्टी के आगरा निवासी नेता महेश चंद्रा ने भी बसपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। वहीं, मऊ जिले के मोहम्मदाबाद में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान जेके आजाद को पार्टी प्रत्याशी घोषित किया गया। पूर्वांचल क्षेत्र में बसपा का परंपरागत जनाधार रहा है और पार्टी इसी आधार को फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। कार्यकर्ता सम्मेलनों के जरिए स्थानीय नेताओं को जिम्मेदारी सौंपने और समय रहते उम्मीदवारों की घोषणा करने की रणनीति को संगठनात्मक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।
बसपा की यह रणनीति अन्य राजनीतिक दलों के लिए भी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। कार्यकर्ता सम्मेलनों में बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी के बीच प्रत्याशियों की घोषणा से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ रहा है और चुनावी तैयारियों को समय से पहले गति मिल रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पहले से घोषित उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान तेज कर सकेंगे, जिससे संगठन को चुनाव तक मजबूत आधार तैयार करने में मदद मिलेगी। यही कारण है कि बसपा लगातार मंडल और जिला स्तर पर संगठन में बदलाव करते हुए नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंप रही है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में सहारनपुर और सुल्तानपुर में भी बड़े कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जहां कई और विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों के नाम घोषित किए जा सकते हैं। बसपा नेतृत्व का प्रयास है कि चुनावी रणनीति को समय रहते अंतिम रूप देकर संगठन को पूरी तरह सक्रिय किया जाए। लगातार हो रही नेताओं की घर वापसी, नए चेहरों की एंट्री और कार्यकर्ता सम्मेलनों के माध्यम से बसपा यह संकेत देने की कोशिश कर रही है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में मजबूती के साथ मैदान में उतरने और प्रदेश की राजनीति में अपनी खोई हुई पकड़ दोबारा हासिल करने के लिए पूरी तैयारी में जुट चुकी है।


